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बासमती किसानों को नहीं मिली राहत | चावल निर्यातकों ने हरियाणा समेत 7 राज्यों में बासमती धान की खरीद की बंद

चावल निर्यातकों ने हरियाणा समेत 7 राज्यों में बासमती धान की खरीद की बंद

किसान साथियो भारत सरकार के एक फैसले के बाद बासमती की खरीद को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। राइस मिलर ने तत्काल प्रभाव से धान की खरीद को बंद कर दिया है। हरियाणा समेत 7 राज्यों में बासमती की खरीद बंद हो गई है।


 साथियों जैसा कि हमने अपनी कल की रिपोर्ट में बताया था कि केंद्र सरकार ने बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य ( MEP ) अगले आदेश तक 1,200 डॉलर प्रति टन ही जारी रखने का फैसला किया है। इस फैसले का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। देशभर के चावल निर्यातकों ने रविवार से ही हरियाणा समेत 7 राज्यों की अनाज मंडियों से बासमती धान की खरीद बंद कर दी है । अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ ने मांग की है कि बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य (Minimum Export Price ) 850 डॉलर प्रति टन किया जाए। निर्यातकों का कहना है कि मांग पूरी होने तक उनका विरोध जारी रहेगा। WhatsApp पर भाव देखने के लिए हमारा ग्रुप जॉइन करें

अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष नाथी राम गुप्ता ने बताया कि सितंबर मे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ देशभर के 165 एक्सपोर्टर्स की बैठक हुई थी। इसमें हमने बताया था कि 1121 व 1509 का सेला चावल 1200 डॉलर प्रति टन के भाव पर निर्यात नहीं हो सकता। खास तौर पर ऐसी स्थिति में जब दूसरे देश सस्ते में बेच रहे हैं। इसलिए हमने सरकार से बासमती के MEP को 850 डॉलर प्रति टन करने की मंजूरी देने का आग्रह किया था। बैठक में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही इसका नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा । इस मामले में कमेटी भी बनाई गई थी। कमेटी ने हरियाणा, पंजाब व यूपी मे दौरे कर रिपोर्ट भी सरकार को सौंप दी है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने दोबारा 1200 डॉलर प्रति टन में चावल निर्यात करने के लिए एक्सपोर्टर्स को कहा है। अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ (AIREA) ने कहा कि यदि कोई निर्यातक धान खरीदेगा तो उनका नाम सार्वजनिक किया जाएगा। संघ ने बताया कि हरियाणा, पंजाब, यूपी, राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश व जम्मू-कश्मीर में रविवार से खरीद बंद कर दी है।

पाक समेत कई देश सस्ता बेच रहे है चावल
साथियो अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया ने बताया कि तुर्की और इराक में हुए वर्ल्ड फूड मेले में भारत के निर्यातक गए थे, लेकिन वहां ऊंचे भाव पर 1509 के सौदे नहीं हो सके, क्योंकि पाकिस्तान समेत कई अन्य देशों के निर्यातक सस्ते में चावल बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस बात को समझना चाहिए कि 1509 किस्म का चावल 6000 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक सकता है। निर्यातक इसे 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कैसे बेंचे। इस बार पाकिस्तान में फसल भी बहुत ज्यादा है, वहां बासमती धान के सौदे हमसे ज्यादा हो रहे हैं।

भारतीय किसान यूनियन भी खफा
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने इस मामले को लेकर आरोप लगाया है कि यह किसानों को लूटने की साजिश है। इस समय जब 1121 और 1718 की फ़सल आने वाली है ऐसे समय में इस तरह के फैसले लेना गलत है। न्यूनतम निर्यात मूल्य की शर्त को हटाकर किसानों की फसलों को ज्यादा दामों पर बिकवाना चाहिए। चूंकि किसानों के पास धान को स्टॉक करने की क्षमता नहीं है इसलिये मंडियों में धान न बिकने से किसान परेशान हो जाएंगे और सस्ते दामों पर बेचने पर मजबूर होंगे। सरकार को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।