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जीरे में तेजी की क्या है बड़ी वज़ह | जीरे की तेजी कितनी टिकाऊ | जाने इस रिपोर्ट में

जीरे में तेजी की क्या है बड़ी वज़ह | जीरे की तेजी कितनी टिकाऊ | जाने इस रिपोर्ट में

किसान साथियो ऊंझा सहित अन्य घरेलू थोक मंडियों में आज जीरे की कीमतों में तेजी आई। व्यापारिक सूत्रों ने कहा कि पिछले दिनों हुई वर्षा और इसके बाद बाढ़ आने की वजह से चीन में जीरे की नई फसल को हानि होने की चर्चाएं चल रही हैं। इसी वजह से इस प्रमुख किराना जिंस की थोक कीमत में यह तेजी आई है लेकिन यह तेजी अस्थाई ही साबित होने के आसार हैं। स्थानीय थोक किराना बाजार में स्टॉकिस्टों की लिवाली बढ़ने से जीरा सामान्य 600-800 रुपए तेज होकर 23,800/24,300 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया। एक दिन पूर्व इसमें 100 रुपए की नरमी आई थी। व्यापारियों ने बताया कि चीन में आने वाली फसल को कुछ हानि होने की चर्चाओं तथा ऊंझा से तेजी के समाचार मिलने के कारण जीरे में नवीनतम तेजी आई है। WhatsApp पर भाव देखने के लिए हमारा ग्रुप जॉइन करें

साथियो उंझा के एक व्यापारी ने बताया कि कीमत उम्मीद से नीची होने के कारण किसानों की बिकवाली सीमित ही बनी होने के कारण यहां जीरे की आवक पहले से ही सामान्य की अपेक्षा नीची हो रही है। इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय भी ऊंझा मंड़ी में जीरे की करीब 20-22 हजार बोरियों की ही आवक हुई। आवक तुलनात्मक रूप से नीची होने तथा चीन में जीरे की आने वाली नई फसल को हानि होने की चर्चाओं ने इसकी नवीनतम तेजी को समर्थन प्रदान किया। उन्होंने आगे बताया कि यहां जीरा क्वालिटीनुसार 120-175 रुपए उछलकर 4950/5040 रुपए प्रति 20 किलोग्राम के स्तर पर जा पहुंचा। एक दिन पूर्व भी इसमें 25-50 रुपए की तेजी आई थी। हाजिर बाजारों की तरह ही वायदा में भी सटोरियों की भारी लिवाली देखी गई। एनसीडीईएक्स का सर्वाधिक सक्रिय जीरा वायदा 5 प्रतिशत उछलने की जानकारी मिली। 2640 रुपये में अपने गेहू को बेचने के लिए लिंक पर क्लिक कर

साथियो उंझा के एक व्यापारी ने बताया कि जल्दी ही चीन में जीरे की नई फसल शुरू होने के आसार हैं। हालांकि पिछले दिनों वहां भारी वर्षा हुई थी। इसकी वजह से कुछ क्षेत्रों में बाढ़ भी आ गई थी। इस वर्षा और बाढ़ की वजह से चीन की आने वाली फसल को कुछ हानि होने की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चीन में जीरे की फसल को हानि हुई है या नहीं। अगर हानि हुई है तो कितनी हुई है, इसकी भी अभी कोई जानकारी नहीं है। इसके अलावा तुर्की एवं सीरिया में भी जीरे की नई फसल चालू महीने मई महीने के अंत या आगामी महीने के आरंभिक पखवाड़े में शुरू होने का अनुमान है। हालांकि पूर्व में केवल तुर्की-सीरिया में ही जीरे का उत्पादन होता था लेकिन बीते कुछेक वर्षों से अफगानिस्तान में भी जीरे का उत्पादन होने लगा है।

साथियो तुर्की तथा सीरिया में संयुक्त तौर पर कुल करीब 30-35 हजार टन जीरे का उत्पादन होता है और अफगानिस्तान में इसकी करीब 10 हजार टन मात्रा का ही उत्पादन होता है। इससे भी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इन तीनों ही देशों के जीरे की क्वालिटी भारत की अपेक्षा हल्की आती है। इसके बाद भी अन्य देशों के साथ-साथ भारत के भी कुछ ब्रांडेड मसाला निर्माता इन देशों से जीरे का आयात करते हैं। बहरहाल, मसाला बोर्ड के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हाल ही में समाप्त हुए वित्त वर्ष 2023-24 के आरंभिक दस महीनों यानी अप्रैल-जनवरी, 2023-24 में जीरे का कुल 1,20,136.58 टन का हुआ। इससे 4499.35 करोड़ रुपए की आय हुई। एक वर्ष पूर्व की आलोच्य अवधि में देश से 3347.11 करोड़ रुपए मूल्य के 1,54,806.65 टन जीरे का निर्यात हुआ था। किसान साथियो मंडी भाव टुडे का मानना है कि किसानो को जीरे मैं आई इस तेजी का फायदा उठा लेना चाहिए क्योंकि पिछले साल के मुकाबले जीरे का उत्पादन ज्यादा है और यहां से आगे जीरे में बहुत बड़ी तेजी की संभावना कम है इसलिए थोड़ा-थोड़ा माल निकालते रहने में ही समझदारी है। बाकि व्यापार अपने विवेक से करें

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।