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सरसों को रोकने में फायदा है या नहीं | जाने सरसों की तेजी मंदी रिपोर्ट में

सरसों को रोकने में फायदा है या नहीं | जाने सरसों की तेजी मंदी रिपोर्ट में

किसान साथियो विदेशी बाजारों से लेकर घरेलू बाजार में तेल तिलहन के किसानों और व्यापारियों की हालत किसी से छुपी नहीं है। सरसों के भाव अपने न्यूनतम स्तरों के आसपास चल रहे हैं। किसानों को उम्मीद थी कि इस साल सरसों के अच्छे भाव मिलेंगे, लेकिन इस साल मंडियों में सरसों की लगातार पिटाई हो रही है। मंडियों में सरसों के भाव 4500 से 5100 के आसपास ही मिल पा रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि इतने कम भाव में सरसों बेचने की बजाय सरसों को रोक कर आने वाले समय में बेचा जाए तो इससे फायदा मिलेगा या नहीं। अगर आप इस सवाल का जबाव ढूंढना चाहते हैं तो आप सही जगह पर आ गए हैं और आपको यह रिपोर्ट अंत तक पढ़नी चाहिए। WhatsApp पर भाव देखने के लिए हमारा ग्रुप जॉइन करें

होली के बाद से ही बाजार पर दबाव
होली के बाद से ही विदेशी बाजारों में कमजोरी के रुख के बीच बुधवार को देश के तेल-तिलहन बाजारों में सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। ऊंचे दाम पर खरीद कमजोर रहने के चलते सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बंद हुई। USDA की रिपोर्ट में सोयाबीन की फ़सल के लिए सहायक मौसम रहने की खबर के बाद से सोया और पाम तेल के भाव पर दबाव बना हुआ है। लेकिन मंडियों में सरसों की आवक साढ़े सात लाख बोरी से घटकर लगभग सात लाख बोरी रह गई। आवक घटने के कारण सरसों के भाव स्थिर रहे अन्यथा इसमे बड़ी गिरावट हो सकती थी।

मंडियों में किसानी माल के क्या हैं हाल
सरसों के पिटते भाव को देखते हुए बड़े किसान कम मात्रा में ही अपनी सरसों लेकर बाजार में जा रहे हैं। इस समय मंडियों में सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 10-12 प्रतिशत नीचे बिक रहा है। इसकी दूसरी वज़ह यह भी है कि किसानों को इस बार बड़ी मात्रा में सरसों की एमएसपी पर सरकारी खरीद होने की उम्मीद है इसलिए बड़े किसान मंडियों में जाने से परहेज कर रहे हैं। केवल छोटे एवं जरूरतमंद किसान ही अपनी उपज बेच रहे हैं क्योंकि उन्हें पैसे की जरूरत है। देखे आज एमपी के अनाज के लाइव मंडी रेट 27 मार्च 2024

ताजा मार्केट अपडेट
बात ताजा बाजार भाव की करें तो आयातित खाद्वय तेल सस्ते होने के कारण घरेलू बाजार में बुधवार को सरसों के भाव कमजोर हो गए। जयपुर में कंडीशन की सरसों के भाव 25 रुपये कमजोर होकर दाम 5,475 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। प्लांटों में सुबह 50-100 की गिरावट आई लेकिन कम आवक को देखते हुए शाम को इतना बाजार रिकवर हो गया। ग्राहकी कमजोर होने से घरेलू बाजार में सरसों तेल की कीमतों में ओवर ऑल मंदा ही चल रहा है, जबकि सरसों खल के भाव पर भी दबाव भी है । उत्पादक मंडियों में बुधवार को भी सरसों की दैनिक आवकों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार को सरकारी खरीद का सहारा भी मिला है हरियाणा की रेवाड़ी मंडी में MSP 5650 के हिसाब से सरसों की खरीद शुरू हो गई है। व्यापारियों के मार्च क्लोजिंग के कारण तेल मिलें केवल जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है। हालांकि मौसम अनुकूल रहा तो सरसों की दैनिक आवक उत्पादक मंडियों में बनी रहने की संभावना है।

सरसों की कम आवक के को देखते हुए बड़ी तेल मिलों ने सरसों खरीद का दाम 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया तो है। लेकिन मौजूदा भाव में सरसों पेराई करने पर मिलों को सरसों तेल पड़ता नहीं बैठ रहा है जिससे उन्हें नुकसान हो रहा है। इसी नुकसान के कारण ही सरसों के भाव में तेजी नहीं आ पा रही है।

ऊंचे भाव पर सरसों के साथ साथ मूंगफली तेल के ग्राहक भी कम हैं। कारोबार नहीं के बराबर है। तेल पेराई मिलों का इसमें बुरा हाल हो रहा है। यही हाल सोयाबीन का भी है। सोयाबीन में एमएसपी से नीचे दाम पर भी माल खप नहीं रहा है। जो हाल इस बार सोयाबीन का हुआ है उसे देखते हुए लगता है कि अगली बार सोयाबीन की खेती घटेगी और किसान इसकी जगह संभवत मोटे अनाज की ओर जा सकते हैं। एमएसपी पर सरकार खरीद कर भी ले तो उससे काम पूरा नहीं होगा। जब तक देशी सोयाबीन, बिनौला, सरसों, मूंगफली तेल का बाजार नहीं बनेगा तब तक न तो तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ेगा न हम आत्मनिर्भर होने के रास्ते पर जा सकेंगे।

सरसों तेल और खल के रेट
घरेलू बाजार में तेल और खल के भाव को देखें तो जयपुर में सरसों तेल कच्ची घानी और एक्सपेलर की कीमतों में बुधवार को कमजोरी आई। सरसों तेल कच्ची घानी सरसों तेल के भाव 14 रुपये कमजोर होकर दाम 1,025 रुपये प्रति 10 किलो रह गए, जबकि सरसों एक्सपेलर तेल के दाम भी 14 घटकर भाव 1,015 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। जयपुर में बुधवार को सरसों खल की कीमतें पांच रुपये घटकर 2,475 रुपये प्रति क्विंटल रह गई।

विदेशी बाजारों में कमजोरी का रुख
USDA की रिपोर्ट के बाद विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। मलेशियाई पाम तेल के भाव में 2% से ज्यादा का मंदा आया, साथ ही अमेरिका के शिकागो में सोया तेल के भाव भी कमजोर हुए। तेल तिलहन के जानकारों का कहना है कि विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है, जिसका असर घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों पर बना रहेगा।

सरसों की आवक घटी
त्योहार होने के कारण कई मंडियां बंद रहीं जिसके चलते आवक में गिरावट देखने को मिली है। देशभर की मंडियों में सरसों की दैनिक आवक घटकर सात लाख बोरियों की ही हुई, जबकि पिछले कारोबारी दिवस में आवक 7.50 बोरियों की हुई थी। कुल आवकों में से प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान की मंडियों में नई सरसों की 4 लाख बोरी, जबकि मध्य प्रदेश की मंडियों में 65 हजार बोरी, उत्तर प्रदेश की मंडियों में 70 हजार बोरी, पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों में 55 हजार बोरी तथा गुजरात में 25 हजार बोरी, एवं अन्य राज्यों की मंडियों में 85 हजार बोरियों की आवक हुई।

क्या सरसों को रोकने में फायदा है?
किसान साथियो आप खुद ही सोचिए कि पिछले सरकार ने इतने बड़े पैमाने पर विदेशी तेलों का आयात किया है कि हमारे किसानों द्वारा उत्पादित सरसों और सोयाबीन भी पूरी तरह से नहीं खप पायी है। पिछले साल का लगभग 15 लाख टन सरसों का स्टॉक बचा हुआ है। चालू सीज़न जिस तरह से सरसों का उत्पादन बताया जा रहा है उसे देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि सरसों के भाव में जल्दी ही कोई तेजी आने वाली है। अगर विदेशी बाजारों में खाद्य तेलों में तेजी आती है और सरकार को वहां का आयातित माल महंगा पड़ता है तभी जाकर कुछ बात बन सकती है। चुनावी माहौल को देखते हुए सरकार भी आयात कर बढ़ाने जैसा कुछ करने वाली नहीं दिख रही। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य तेलों की डिमांड और सप्लाई को देखें तो ऐसा नहीं लगता की बहुत जल्दी विदेशी बाजारों में खाद्य तेलों के भाव बढ़ने वाले हैं। हालांकि 10-15% की तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इसमें किसान बड़ी तेजी ढूंढने की कोशिश ना करें। किसान साथियों सरसों की फसल एक ऐसी फसल है जो लंबे समय तक खराब नहीं होती अगर आप माल को होल्ड करना चाहते हैं तो होल्ड कर लें लेकिन आपको लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। अगर सरसों में आपको 6000 के ऊपर के भाव चाहिए तो आपको दिवाली तक का इंतजार भी करना पड़ सकता है। व्यापार अपने विवेक से ही करें।

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।