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क्या गेहूं का भाव 2600 से भी निचे जा सकता है | जाने पूरी जानकारी इस रिपोर्ट में

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किसान साथियो और व्यापारी भाइयो इन दिनों भारत के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों की मंडियों में गेहूं की आवक का दबाव लगातार बढ़ रहा है जिससे गेहूं की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। कई मुख्य क्षेत्रों में गेहूं की कटाई अभी भी तेजी से चल रही है, और अनुमान है कि लगभग 15 अप्रैल से आवक में भारी वृद्धि होगी, जो प्रतिदिन 25,000 से 30,000 बोरियों तक पहुंच सकती है। इसके विपरीत, आटा, रवा और मैदा की मांग सीमित है, जिसके कारण मिलर्स द्वारा खरीद भी सुस्त है। मिलर्स द्वारा सीमित खरीद का एक कारण मार्च की समाप्ति भी है। बढ़ती आवक और घटती खरीद के बीच, इस सप्ताह गेहूं की कीमतों में गिरावट देखी गई है। दक्षिण भारत से मांग में कमी एक और महत्वपूर्ण कारक है। कीमतों में बड़ी तेजी के लिए, दक्षिण भारत से मांग पर सबकी नजरें टिकी रहती हैं, क्योंकि दक्षिण भारत गेहूं की खपत के लिए एक प्रमुख क्षेत्र है। हालांकि, मार्च की समाप्ति के कारण, इन दिनों बेंगलुरु और हैदराबाद से खरीद कमजोर है, और मिलर्स भी ऊंचे दामों पर खरीदने में रुचि नहीं ले रहे हैं, जिससे भाव डाउन होता जा रहा है। भाव एक सप्ताह में 150 से 200 रुपये तक गिर कर दिल्ली मंडी में गेहूं का भाव आज 2635 पर पहुंच गया है। अगर आप भी मंडी बाजार से जुड़े हैं और आपको रोजाना भाव और आगे का अनुमान साथ में आयात-निर्यात से संबंधित जानकारी चाहते हैं, तो हमारी प्रीमियम सेवा मात्र ₹500 में 6 महीने के लिए उपलब्ध है। इसके लिए 9518288171 पर संपर्क करें।

 सरकारी खरीद तेजी से बढ़ी
2024-25 विपणन वर्ष में सरकारी एजेंसियों ने किसानों से 26.6 मिलियन टन गेहूं खरीदा था। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन योजना के लिए हर साल लगभग 18.4 मिलियन टन अनाज की आवश्यकता होती है। इस साल भी गेहूं के उत्पादन और बाजार में उसकी आवक में सुधार होने की संभावना है, जिससे देश में गेहूं की आपूर्ति मजबूत बनी रहेगी और कीमतों में स्थिरता आएगी। 2025-26 के विपणन वर्ष के लिए भारतीय खाद्य निगम और राज्य सरकारों की एजेंसियों ने किसानों से गेहूं की खरीद तेज कर दी है। यद्यपि औपचारिक रूप से खरीद 1 अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में पहले ही 0.8 मिलियन टन गेहूं खरीदा जा चुका है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। सरकार का लक्ष्य 2025-26 के विपणन वर्ष में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 31 मिलियन टन गेहूं खरीदना है। इस खरीद में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्य शामिल हैं।

 एफसीआई के पास कितना है स्टॉक
वर्तमान में, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास 12 मिलियन टन गेहूं का भंडार मौजूद है, जो 1 अप्रैल के लिए आवश्यक 7.46 मिलियन टन के बफर स्टॉक से काफी अधिक है। यह अतिरिक्त भंडार देश में गेहूं की अच्छी उपलब्धता को दर्शाता है। किसानों को प्रोत्साहित करने और उनकी आय बढ़ाने के लिए, मध्य प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों ने 2024-25 विपणन वर्ष के लिए गेहूं की खरीद पर बोनस देने की घोषणा की है। मध्य प्रदेश सरकार किसानों को 175 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देगी, जबकि राजस्थान सरकार 150 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस प्रदान करेगी। यह अतिरिक्त प्रोत्साहन किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगा और उन्हें गेहूं की खेती के लिए प्रोत्साहित करेगा।

 केंद्र सरकार द्वारा स्टॉक डिस्क्लोज़र का निर्देश
केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा के प्रबंधन और सट्टेबाजी को रोकने के उद्देश्य से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, चेन खुदरा विक्रेताओं और प्रोसेसर्स से 1 अप्रैल 2025 से गेहूं की अपनी स्टॉक स्थिति घोषित करने को कहा है। सरकार ने यह अनिवार्य कर दिया है कि सभी गेहूं भंडारण संस्थाएं निर्दिष्ट पोर्टल पर पंजीकरण करें और हर शुक्रवार को अपनी स्टॉक स्थिति को अपडेट करें। अगर आप भी मंडी बाजार से जुड़े हैं और आपको रोजाना भाव और आगे का अनुमान साथ में आयात-निर्यात से संबंधित जानकारी चाहते हैं, तो हमारी प्रीमियम सेवा मात्र ₹500 में 6 महीने के लिए उपलब्ध है। इसके लिए 9518288171 पर संपर्क करें। सभी संबंधित कानूनी संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि पोर्टल पर स्टॉक का नियमित और सही तरीके से खुलासा किया जाए। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सभी श्रेणियों की संस्थाओं के लिए गेहूं की स्टॉक सीमा, या ऐसी संस्थाओं द्वारा रखी जा सकने वाली अधिकतम मात्रा, 31 मार्च 2025 को समाप्त हो रही है। सरकार कीमतों को नियंत्रित करने और देश में आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गेहूं की स्थिति पर नज़र रख रही है।

 आगे क्या रह सकता है गेहूं के बाजार में
किसान साथियो और व्यापारी भाइयो, आप देख ही रहे हैं कि इस समय पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश में मौसम गेहूं की खेती के अनुकूल बना हुआ है। इसे देखते हुए बम्पर फसल की उम्मीद की जा रही है।  इसी वजह से लेवाल  थोड़ा पीछे हट गए हैं और इन्तजार करने के मूड में दिख रहे हैं।  आप देख ही रहे हैं कि पिछले एक सप्ताह में दिल्ली में गेहूं के भाव में 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई है, और भाव 2635 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। और आज अभी ज्यादातर मंडियों में गेहूं में गिरावट ही देखने को मिल रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या दिल्ली में गेहूं का भाव 2600 से नीचे जायेंगे। अगर आप भी मंडी बाजार से जुड़े हैं और आपको रोजाना भाव और आगे का अनुमान साथ में आयात-निर्यात से संबंधित जानकारी चाहते हैं, तो हमारी प्रीमियम सेवा मात्र ₹500 में 6 महीने के लिए उपलब्ध है। इसके लिए 9518288171 पर संपर्क करें। तो साथियो व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में मांग में कमी देखते हुए और बाजार में बढ़ रही नई आवक से आने वाले दिनों में 50 से 75 रुपये तक की और गिरावट देखने को मिल सकती है। मंडी मार्केट मिडिया का मानना है कि गेहूं का रेट 2525 से 2550 के बीच सेटल होना चाहिए। पुराने स्टॉक और सरकारी खरीद के रुझान को देखते हुए बाजार के इससे नीचे जाने की उम्मीद नहीं है। बाकी व्यापार अपने विवेक से करें।

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।