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चना के भाव में और कितनी आएगी तेजी | जाने पूरी जानकारी इस रिपोर्ट में

चना के भाव में और कितनी आएगी तेजी | जाने पूरी जानकारी इस रिपोर्ट में

किसान साथियो पिछले महीने सरकार द्वारा देसी चने की महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आयात शुल्क 40 प्रतिशत से घटाकर जीरो प्रतिशत कर दिया गया है, इसके बावजूद भी घरेलू फसल में पोल से शॉर्टेज की स्थिति बनी हुई है। दूसरी और ऑस्ट्रेलिया में चने के भाव बढ़ जाने से बाजार 500 रुपए छलांग लगा गए हैं तथा अभी और तेजी की संभावना प्रबल हो गई है। इस बार देसी चने की बिजाई मध्य प्रदेश राजस्थान महाराष्ट्र कर्नाटक आंध्र प्रदेश सहित सभी उत्पादक राज्यों में 38-40 प्रतिशत कम हुई थी तथा मौसम भी प्रतिकूल होने से प्रति हैक्टेयर उत्पादकता कम बैठी है। यही कारण है की देसी चने का उत्पादन 65 लाख मीट्रिक टन के करीब रह गया है। सरकार के आंकड़े कुछ भी कहते रहे, लेकिन प्रत्यक्ष दर्शियों के मुताबिक मड़ाई के बाद किसी भी मंडी में चने का प्रेशर नहीं दिखाई दे रहा है। WhatsApp पर भाव देखने के लिए हमारा ग्रुप जॉइन करे

साथियो दूसरी ओर पुराना स्टॉक भी इस बार सरकारी व गैर सरकारी गोदामों में काफी काम हो पाया है, जिस कारण दाल मिलों को अभी से मिलिंग के लिए माल मिलना मुश्किल हो गया है। चालू महीने के शुरुआत में ही देसी चने के भाव नीचे में 6300 रुपए बन गए थे, लेकिन इन भाव में माल नहीं मिलने तथा ऑस्ट्रेलिया में 710 डॉलर से बढ़कर 875 डॉलर प्रति टन हो जाने से यहां राजस्थानी चना 10 दिनों के अंतराल 500 रुपए बढ़कर 6800 रुपए प्रति कुंतल की ऊंचाई पर जा पहुंचा है। इसकी दाल भी 6800 रुपए 10 दिन पहले बनने के बाद वर्तमान में 7550 रुपए प्रति कुंतल हो गई है। हम मानते हैं कि कम समय में देसी चने में 500 रुपए प्रति कुंतल की तेजी आने पर एक बार करेक्शन आ सकता है, लेकिन सकल उत्पादन में कमी तथा आयात पड़ता महंगा होने से बाजार आगे चलकर 500/600 रुपए और बढ़ सकता है।

साथियो गौर करने की बात तो यह है कि भारत में ही देसी चने की खपत अन्य देशों की अपेक्षा अधिक होती है, इसे देखकर विदेशों के निर्यातक बढ़ाकर कीमतें बोलने लगे हैं। व्यापारियों का कहना है कि वहां का चना आकर 7200 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास पड़ेगा। अतः घरेलू देसी चने में मंदे की संभावना नहीं है। यहां उत्पादन कम होने से आगे बाजार और बढ़ जाएगा। मध्य प्रदेश महाराष्ट्र एवं राजस्थान की मंडियों में देसी चने की आवक टूट गई है तथा निकट में कोई फसल आने वाली नहीं है। अतः वर्तमान भाव में देसी चने एवं इसकी दाल में खुलकर व्यापार करना चाहिए। 5750 रुपये में अपनी सरसों को बेचने के लिए लिंक पर क्लिक करे

साथियो चना की कीमतों में तेजी बनी हुई है तथा हाल ही में इसके दाम करीब 325 रुपये प्रति क्विंटल तेज हो चुकी है, इसलिए मुनाफावसूली आ सकती है। हालांकि चना में माल की मिलकत कम है, जिस कारण बिकवाली भी कम आ रही है। इसलिए इसके भाव में बड़ी गिरावट के आसार नहीं है। उत्पादक मंडियों में चना की आवक अपेक्षा अनुरूप बढ़ नहीं पा रही है, क्योंकि चालू सीजन में चना का उत्पादन अनुमान कम है। उधर ऑस्ट्रेलिया में दाम तेज होने के कारण आयात पड़ते महंगे हुए हैं, इसलिए चना का भविष्य तेजी का ही है जानकारों के अनुसार चना में समय, समय पर मुनाफावसूली करते रहे।

मुंबई में कनाडा की पीली मटर के दाम 4,150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान हजिरा बंदरगाह पर रसिया की पीली मटर के भाव 3,975 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। मुंद्रा बंदरगाह पर रसिया की पीली मटर के भाव 4,000 रुपये और कनाडा की पीली मटर के दाम 4,125 से 4,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। कानपुर में देसी मटर के भाव 100 रुपये तेज होकर दाम 4,425 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। दिल्ली में राजस्थान लाइन के नए चना के दाम 100 रुपये बढ़कर 6,725 से 6,750 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान मध्य प्रदेश लाइन के नए चना के भाव 100 रुपये तेज होकर 6,700 से 6,725 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। बाकी व्यापार अपने विवेक से करे

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मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।