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MSP पर गेहूं बचने से पहले जान ले ये सरकारी नियम | जाने नमी और सिकुड़े दानों के लिए कितना MSP देगी सरकार

 MSP पर गेहूं बचने से पहले जान ले ये सरकारी नियम | जाने नमी और सिकुड़े दानों के लिए कितना MSP देगी सरकार

होली का रंग अब चेहरों से फीका पड़ने लगा है। इस बीच खेत में गेहूं की फसल पक कर तैयार हो गयी है. इसलिए कई राज्यों में किसानों ने गेहूं की कटाई शुरू कर दी है और कई राज्यों में किसान गेहूं की कटाई की तैयारी भी कर रहे हैं, जिसे देखते हुए कई राज्य सरकारों ने एमएसपी पर गेहूं खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. तो कई राज्यों में एमएसपी पर गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से शुरू हो जाएगी. WhatsApp पर भाव देखने के लिए हमारा ग्रुप जॉइन करें

इसी तरह कई जगहों पर निजी कंपनियों ने भी किसानों से अनाज खरीदने का कार्यक्रम शुरू किया है. गेहूं खरीद की इन सभी तैयारियों के बीच देश के कई राज्यों में मौसम में बदलाव की उम्मीद है, यही वजह है कि आईएमडी ने कई राज्यों में बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है. ऐसे में गेहूं की खड़ी फसल को नुकसान हो सकता है, जिससे किसानों को फसल बेचने में दिक्कत हो सकती है. इस पोस्ट में बात करेंगे एमएसपी पर गेहूं बेचने के प्रभावी नियमों के बारे में, जिसके अनुसार हम जानेंगे कि एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए नमी की मात्रा, चमक, सिकुड़ा हुआ और टूटा हुआ गेहूं का गणित क्‍या है.

किसने बनाए है गेहूं खरीद के नियम
किसान साथियो इससे पहले कि हम विस्तार से बात करें कि एमएसपी पर गेहू बेचने के नियम क्या हैं, आइए जानते हैं कि ये नियम किसने बनाए हैं। दरअसल, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा एमएसपी पर गेहूं खरीदा जाता है. केंद्र की ओर से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) किसानों से गेहूं खरीदता है, जबकि राज्य सरकार अपनी एजेंसियों के माध्यम से गेहूं खरीदती है। एमएसपी किसानों से गेहू खरीदने के लिए, एफसीआई और राज्य एजेंसियां ​​गांवों में क्रय केंद्र स्थापित करती हैं, जहां एफसीआई गुणवत्ता नियंत्रण नियमों को मानक के रूप में लागू किया जाता है। ये मानदंड केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय और केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हैं।

गेहूं खरीद के क्या नियम बनाए गए है
एमएसपी पर गेहूं खरीदते समय नमी, चमक, सिकुड़ा और टूटा हुआ गेहूं और गेहूं जैसी अन्य फसलों के गेहूं की मात्रा जैसे मापदंडों का पालन किया जाता है। नियमों के मुताबिक इसके लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं. इन नियमों की जानकारी किसान को लखनऊ गेहूं विपणन केंद्र के अधिकारी माटू लाल और सेवानिवृत्त एफसीआई अधिकारी विजय श्रीवास्तव ने दी। आइए इस बारे में विस्तार से बात करते हैं.

गेहूं में कितनी होनी चाहिए नमी
एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को गेहूं की नमी पर विशेष ध्यान देना होगा. गेहूं में नमी की मात्रा के बारे में गेहूं विपणन केंद्र, लखनऊ के प्रवक्ता माटू लाल का कहना है कि अगर गेहूं में नमी की मात्रा 12 से 14 फीसदी के बीच है तो उसे एमएसपी से खरीदा जाता है. इस मूल्य से अधिक मात्रा होने पर गेहूं नहीं खरीदा जाएगा। ऐसे में किसानों को गेहूं को गीला करने की जरूरत है। उनका कहना है कि बीच में एक गेहूं नमी मीटर है जिसका उपयोग नमी मापने के लिए किया जाता है। देखे आज एमपी के अनाज के लाइव मंडी रेट 28 मार्च 2024

सिकुड़े दानों को लेकर क्‍या कहता है नियम
गेहूं की फसल में स्वस्थ दानों के साथ ही सिकुड़े दाने भी आम होते हैं। ऐसी फसलों के लिए भी, एमएसपी पर खरीद के लिए नियम बनाए गए हैं। इन नियमों के बारे में जानकारी देते हुए माटू लाल बताते हैं कि यदि कुल फसल में 6% सिकुड़े या टूटे दाने होते हैं, तो भी उसे एमएसपी पर खरीदा जाएगा। उनका कहना है कि गेहूं में सिकुड़े और टूटे दानों की पहचान करने के लिए कोई मशीन नहीं है। इसे खेत में इन्जार्च के अनुभवी कर्मचारियों की जिम्मेदारी है।

गेहूं के अंदर दूसरे अनाज की कितनी मात्रा होनी चाहिए
रबी मौसम में किसान अक्सर गेहूं के साथ अन्य फसलों की भी खेती करते हैं। इसके परिणामस्वरूप, गेहूं की कड़ाई के समय उन्हें दूसरी फसलें भी साथ में मिल जाती हैं। यह फसलें पूरी तरह से साफ करना बहुत मुश्किल होता है। लखनऊ के गेहूं विपणन केंद्र के अधिकारी माटू लाल बताते हैं कि इसके लिए नियम हैं, जिसके अनुसार गेहूं में दूसरे अनाज की मात्रा 0.75 से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक होने पर किसानों को फसल साफ कराने की जरूरत होती है।
 
गेहूं में चमक की कितनी मात्रा होनी चाहिए
बारिश के कारण गेहूं के दानों का रंग उड़ जाता है, जिससे किसानों को नुकसान होता है। इस मुद्दे पर माटू लाल बताते हैं कि गेहूं की चमक के संबंध में नियमों में परिवर्तन होता रहता है। यदि बारिश से किसानों की फसल को नुकसान होता है और गेहूं की चमक कम हो जाती है, तो राज्य सरकारें इसे ध्यान में रखती हैं। नियमों के अनुसार, यदि गेहूं की चमक में 10 फीसदी तक कमी होती है, तो पूरा एमएसपी (MSP) दिया जाएगा, इसके बाद चमक में कमी होने पर MSP में कटौती होती है।

गेहूं की सफाई सेंटर पर कर सकते हैं किसान
किसानों को अपनी फसल को सही दाम में बेचने के लिए, विपणन केंद्रों में पूरी व्यवस्था की जाती है। माटू लाल बताते हैं कि सेंटरों में तिरपाल, पंखा, और छलनी जैसी सुविधाएं होती हैं। इसके अलावा, एफसीआई के सेवानिवृत अधिकारी विजय श्रीवास्तव बताते हैं कि अब निजी कंपनियाँ भी सरकार के साथ गेहूं की खरीद कर रही हैं। इसलिए, किसानों को अपनी फसल की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। गेहूं मड़ाई के समय, मिट्टी, भूसा, और दूसरी फसलों के दाने भी मिल सकते हैं। इसलिए, किसानों को इन्हें हटाने की जरूरत होती है। बिना साफ फसल के, दाम कम हो सकते हैं। इसलिए, सेंटरों में फसल साफ करने की व्यवस्था होती है, जिसमें गेहूं में मिली मिट्टी और भूसा हटाने के लिए छलना लगाया जाता है। इस काम के लिए किसानों से कोई भुगतान नहीं देना होता है, केवल किसानो को मजदूरों का ही भुगतान करना होगा।

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।