गेहूं की सरकारी खऱीद पर बन रहा संशय | क्या पूरा होगा खऱीद लक्ष्य
किसान साथियों और व्यापारी भाइयों भारत सरकार ने रबी मार्केटिंग सीज़न 2025-26 के लिए 310 लाख टन गेहूं खऱीद का लक्ष्य रखा है। लेकिन जिस तरह से बाजार में गेहूं के रेट चल रहे हैं उसे देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि यह खऱीद लक्ष्य इतनी आसानी से पूरा होने वाला है। आज की रिपोर्ट इन हम गेहूं के बाजार की सभी स्थितियों को समझने की कोशिश करेंगे
सरकार ने खुले बाजार में गेहूं बेचना बंद किया
भारत सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत खुले बाजार में गेहूं बेचना बंद कर दिया है। सरकार ने 3 मिलियन टन में से 2.97 मिलियन टन गेहूं की बिक्री कर दी है। इसका मकसद कीमतों को काबू में रखना था, लेकिन इसके बावजूद गेहूं की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,425 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर बनी हुई हैं।
बाजार में गेहूं की कीमतें MSP से ऊपर
हाल ही में हुई नीलामी में गेहूं की कीमतें 2,540 से 3,275 रुपए प्रति क्विंटल के बीच रहीं। कुछ क्षेत्रों में दाम गिरे, लेकिन कुछ में बढ़े भी। जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक 3,275 रुपए प्रति क्विंटल का दाम दर्ज किया गया, जबकि हरियाणा में 570 रुपए प्रति क्विंटल तक गिरावट आई। हालांकि, पंजाब और बिहार में दामों में मामूली गिरावट देखी गई।
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क्या इतनी गिरावट काफी होगी
किसान साथियो कल दिल्ली मंडी में गेहूं के भाव में 100 रूपये की गिरावट दर्ज की गई है कल जब बाजार खुला तो भाव 50 रूपये की गिरावट के साथ 3025 पर खुला था और गिरावट यही नहीं रुकी शाम को भाव में फिर से 50 रुपये की गिरावट दर्ज की गई और भाव 2975 पर बंद हुआ तो कुल मिला कर भाव में 100 रूपये की गिरावट देखी गई । सरकार द्वारा गेहूं के टेंडर में मात्रा बढ़ाए जाने के कारण, पिछले दिनों गेहूं की कीमतों में प्रति क्विंटल 350 रुपये तक की गिरावट आई थी। हालांकि, टेंडर वाले माल की मंडियों में सुचारू रूप से आपूर्ति न होने के कारण, बाजार में पिछले सप्ताह के पहले भाग में 110 रुपये की गिरावट के बाद, सप्ताह के अंत में 100 रुपये की बढ़त हुई, जिससे कीमतें लगभग पहले के स्तर पर पहुंच गईं। वर्तमान में, मिल क्वालिटी गेहूं का भाव 3000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। भाव अभी भी MSP से काफी उपर चल रहे हैं। मंडियों में गेहूं की आवक बढ़ने लगी है, जिससे आने वाले समय में तेजी की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है। व्यापारियों का तो यह भी कहना है कि अभी और गिरावट देखने को मिल सकती है ।
क्या सरकार 31 मिलियन टन गेहूं खरीद पाएगी?
सरकार ने चालू सीजन में 31 मिलियन टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल के 26.61 मिलियन टन के लक्ष्य से अधिक है। लेकिन इस बार सरकार को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि निजी व्यापारी (प्राइवेट ट्रेडर्स) बड़ी मात्रा में गेहूं खरीद रहे हैं।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में बोनस योजना पर नजर
सरकार को उम्मीद है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में बोनस प्रोत्साहन (इन्सेंटिव्स) देकर खरीद को बढ़ाया जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञों को इस पर संदेह है। यदि निजी व्यापारी ज्यादा कीमत देकर किसानों से गेहूं खरीदते हैं, तो सरकार के लिए 31 मिलियन टन का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
क्या किसान MSP पर गेहूं बेचेंगे?
इस साल कई किसानों को खुले बाजार में MSP से ऊंचे दाम मिल सकते हैं। यदि बाजार में गेहूं की कीमतें अधिक बनी रहती हैं, तो किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं लाने के बजाय निजी व्यापारियों को ज्यादा कीमत पर बेच सकते हैं।
आगे क्या है संभावना
- गेहूं की कीमतें फिलहाल MSP से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे सरकारी खरीद प्रभावित हो सकती है।
- निजी व्यापारियों की सक्रियता के कारण सरकार को लक्ष्य पूरा करने में दिक्कत आ सकती है।
- मध्य प्रदेश और राजस्थान में बोनस स्कीम से मदद की उम्मीद है, लेकिन यह कितना कारगर होगा, यह स्पष्ट नहीं है।
- यदि खुले बाजार में कीमतें MSP से अधिक रहीं, तो किसान सरकारी मंडियों में गेहूं बेचने में कम रुचि दिखा सकते हैं।
सरकार को आने वाले हफ्तों में निजी व्यापारियों और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी ताकि यदि जरूरी हो, तो खरीद प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए जा सकें।
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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।