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मांग में कमी और ज्यादा स्टॉक होने के कारण मिर्च की कीमतों में आ सकती है गिरावट | जाने पूरी जानकारी इस रिपोर्ट में

मांग में कमी और ज्यादा स्टॉक होने के कारण मिर्च की कीमतों में आ सकती है गिरावट | जाने पूरी जानकारी इस रिपोर्ट में

किसान साथियो चालू सीजन में भारतीय लाल मिर्च चारों तरफ से मंदी की मार झेल रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक भारतीय लाल मिर्च के सबसे बड़े खरीदार चीन की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, पडोसी बांग्लादेश म्यांमार से खरीदने में रूचि दिखा रहा है, इसलिए भारतीय लाल मिर्च की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। एक निर्यातक ने बताया कि लाल मिर्च की तेजा किस्म के खरीदार चीन से अभी तक कोई मांग नहीं आई है। बाजार में निराशा छाई हुई है, इसलिए जब तक निर्यात के लिए कोई बड़ी मांग नहीं आती है, तब तक निकट भविष्य में करीब जुलाई तक कोई वापसी नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि चीन के पास भरपूर स्टॉक पड़ा हुआ है और लगभग अगले तीन महीने तक चीन की तरफ से मांग आने की कोई संभावना नहीं है। WhatsApp पर भाव देखने के लिए हमारा ग्रुप जॉइन करें

साथियो दरअसल सीजन के शुरुआती दौर में चीन से अच्छी मांग आई थी और इस वर्ष उन्होंने 20-25 प्रतिशत अधिक खरीदारी की है। हालांकि, इस साल बाजार में बांग्लादेश से मांग कम आ रही है, कारण यह है कि बांग्लादेश ने अपना रुख बदलकर म्यांमार से लाल मिर्च का आयात शुरू कर दिया है जहां इस सीजन में मिर्च की फसल अच्छी हुई है। गुंटूर में स्थित आल इंडिया चिली एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन से प्राप्त जानकारी के मुताबिक म्यांमार से आने वाली मिर्च की क्वालिटी अच्छी होने के साथ-साथ वे बांग्लादेश को कम कीमत पर सप्लाई दे रहे हैं, यही कारण है कि बांग्लादेश ने भारतीय बाजार से दूरी बना ली है। स्पाइसेज बोर्ड से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 में चीन और थाईलैंड के बाद बांग्लादेश भारतीय लाल मिर्च का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार था। उन्होंने बताया कि ओलेओरेसिन कंपनियों ने पर्याप्त मात्रा में लाल मिर्च की खरीदारी कर ली है और अगले नौ महीनों के लिए अपनी स्थिति सुरक्षित कर ली है, अतः अब मिर्च की खरीद के लिए बाजार में उनके वापस आने की कोई उम्मीद नहीं है। MP में कंपनी सीधी कर रही हैं खरीद | सोयाबीन में 4700 के उपर के भाव लेने हैं तो यहां बेचे अपना माल

साथियो यदि आवक के हिसाब से देखें तो वारांगल में लगभग 80,000 बोरी और गुंटूर में करीब 1 लाख बोरी की आवक बनी हुई है। मार्केटिंग सीजन भी अप्रैल के अंत तक जारी रहने के आसार दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि कर्नाटक में कोल्ड स्टोरेज भरे हुए हैं और आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना में क्रमशः 8-9 लाख बोरी तथा 2-3 लाख बोरी रखे जाने की गुंजाइश है। ब्यादगी वैरायटी के एक बड़े निर्यातक ने बताया कि मांग में कमी और अच्छी क्वालिटी की आवक न होने के कारण कर्नाटक में भी मिर्च की कीमतें लगातार गिर रहीं हैं। उन्होंने बताया कि इस समय सीजन के शुरुआती दौर के मुकाबले कीमतों में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है, क्योकि अधिकांश खरीदारों ने पहले ही अपनी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त खरीदारी करके अपनी स्थिति सुरक्षित कर ली है। स्टॉक की अधिकता और फसल का रकबा ज्यादा होने से इस वर्ष कर्नाटक में भी मिर्च का बाजार मंदी में है। बाकि व्यापर अपने विवेक से करे

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।