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ऊंझा में जीरे की आवक ने तोड़े सारे रिकॉर्ड | जाने पूरी जानकारी इस रिपोर्ट में

ऊंझा में जीरे की आवक ने तोड़े सारे रिकॉर्ड | जाने पूरी जानकारी इस रिपोर्ट में

किसानी साथियो गुजरात की ऊंझा मंड़ी में जीरे की आवक बढ़ती हुई करीब 55 हजार बोरियों के रिकॉर्ड ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। व्यापारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में यह आवक और बढ़ती हुई 70-80 हजार बोरियों की हो जाए तो कोई हैरानी नहीं होगी क्योंकि अभी गुजरात के ही कुछ क्षेत्रों में इस प्रमुख किराना जिंस की नई फसल शुरू होनी शेष है। महाशिवरात्रि के अवकाश के बाद स्थानीय थोक किराना बाजार में हल्की-फुल्की लिवाली बनी होने से जीरा सामान्य तथा मशीन क्लीन 200-300 रु बढ़कर क्रमशः 27,700/ 28,000 रुपए और 32,000/32,700 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। इसे मिलाकर हाल ही में जीरे में करीब एक हजार रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। व्यापारियों ने बताया कि ऊंझा में जीरे की आवक बढ़ती हुई 50 हजार बोरियों के दैनिक स्तर को भी पार कर जाने की खबरों से इसकी कीमतों में आ रही तेजी पर भी ब्रेक लगने के आसार हैं। WhatsApp पर भाव देखने के लिए हमारा ग्रुप जॉइन करें

कीमतों पर अब लग सकता है ब्रेक
ऊंझा मंड़ी स्थित व्यापारी जतिन पटेल ने बताया कि हमारी मंड़ी में आज जीरे की आवक बढ़ती हुई करीब 54-55 हजार बोरियों की हुई। वर्ष की वर्तमान समयावधि में जीरे की इतनी ऊंची आवक से सभी व्यापारी हैरान हैं। इतना ही नहीं, इसका नवीनतम स्तर पिछले सीजन के दौरान हुई करीब 60 हजार बोरियों की दैनिक आवक के ऊंचे स्तर के भी नजदीक ही है। ऊंझा में इतनी ऊंची आवक होने के बाद भी जीरे की थोक कीमत एक दिन पूर्व के स्तर पर ही बनी रही। वहां जीरा क्वालिटीनुसार 5500/ 5600 रुपए प्रति 20 किलोग्राम के पूर्वस्तर पर ही रुका रहा। श्री पटेल ने बताया कि आवक के नवीनतम स्तर को देखते हुए ऐसा लगता है कि जीरे की बढ़ती जा रही कीमतों पर अब ब्रेक लग सकता है।

क्या जेरी की आवक नया रिकॉर्ड बना सकती है
श्री पटेल ने बताया कि अगले कुछेक दिनों में यदि मौसम साफ बना रहा तो निश्चय ही मंड़ी में जीरे की आवक बढ़ती हुई बीते सीजन के ऊंचे स्तर को न केवल पार कर जाएगी बल्कि यह एक नया और अभी तक न देखा गया स्तर भी कायम कर सकती है। उन्होंने आगे बताया कि फिलहाल अभी राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र से ही जीरे की अधिकतर आवक हो रही है। अभी कच्छ से फसल शुरू होनी शेष है। इतना ही नहीं, अभी राजस्थान से भी माल नहीं आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब कच्छ से भी भरपूर आवक होने लगेगी और राजस्थान के भी माल आने लगेंगे तो ऊंझा मंड़ी में जीरे की आवक बढ़ती हुई 70-80 हजार बोरियों का स्तर कायम कर दे तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी।

क्या कभी इतनी आवक हुई है पहले
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ऐतिहासिक स्तर पर ऊंझा मंड़ी में इतनी ऊंची आवक पहले कभी नहीं हुई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आवक इस अनुमानित स्तर के आसपास होंगी, उस समय जीरे की थोक कीमत क्या होगी ? श्री पटेल ने बताया कि जीरे की थोक कीमत अभी मंदी हो जानी चाहिए थी लेकिन एक-दो स्टॉकिस्टों की सक्रियता बनी होने तथा दिसावरों और निर्यातकों की भी लिवाली का हल्का-फुल्का समर्थन बना होने से इस प्रमुख किराना जिंस की थोक कीमत को समर्थन मिल रहा है। हालांकि भविष्य में भी यह समर्थन बना रहने को लेकर जरूर प्रश्न उठ सकता है।

रोके या बेचे
साथियो ऊंझा में जीरे की आवक ने बढ़ते हुए पिछले वर्ष के ऊंचे स्तर को भी पार कर लिया है। इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय वहां जीरे की करीब 54-55 हजार बोरियों की आवक होने तथा कीमत एक दिन पूर्व के स्तर पर ही बनी होने की सूचना मिली। यहां बढ़ी हुई कीमत पर भी लिवाली मजबूत ही बनी होने से जीरा सामान्य 300 रुपए और तेज होकर 28 हजार रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया। हाल ही में इसमें करीब एक हजार रुपए की तेजी आ चुकी है। वायदा में अवकाश रहा लेकिन इससे पूर्व सक्रिय वायदा 550 रुपए या 2.10 पतिशत तेज होकर 26,750 रुपए पर पहुंच गया था। आने वाले एक-दो दिनों में हाजिर में जीरा बढ़ने की उम्मीद नहीं है। बाकी व्यापार अपने विवेक से करे

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।