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7 फसलों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध हटेगा या नहीं | जाने इस रिपोर्ट में

7 फसलों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध हटेगा या नहीं | जाने इस रिपोर्ट में
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किसान साथियो और व्यापारी भाइयो सरकार ने 7 कृषि उत्पादों के वायदा कारोबार पर लगे प्रतिबंध को एक साल और बढ़ाने का मन बना लिया है। सूत्रों के मुताबिक, यह प्रतिबंध 5वीं बार बढ़ाया जाएगा। खाद्य कीमतों को नियंत्रित करने के लिए, सरकार ने दिसंबर 2021 में चावल, गेहूं, चना, मूंग, सरसों, सोयाबीन और कच्चे पाम तेल सहित 7 कृषि उत्पादों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाया था। यह प्रतिबंध शुरू में एक साल के लिए था, लेकिन इसे चार बार बढ़ाया गया है। फिलहाल, यह प्रतिबंध 31 मार्च 2025 को समाप्त होने वाला था। हालाँकि, अब खबरें आ रही हैं कि इस समय सीमा को एक बार फिर बढ़ाया जाएगा।  नोट :- अगर आपको धान, चावल, सरसों, सोयाबीन, और चना के लाइव भाव whatsapp पर चाहिए तो आप 500 रुपए दे कर 6 महीनो तक लाइव भाव की सर्विस ले सकते है | जिन्हे लेनी है वही व्हाट्सअप पर मैसेज करे 9518288171 इस नंबर पर खाली भाव पूछने के लिए काल या मैसेज ना करे  |

प्रतिबंध को सरकार बढ़ा सकती है 1 साल और आगे
Informist की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मंत्रालयों के बीच गठित समिति ने सात कृषि वस्तुओं के वायदा व्यापार पर प्रतिबंध को एक साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। अधिकारी ने कहा कि अब केवल आदेश का इंतजार है। हालांकि, इस खबर की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सरकार ने दिसंबर 2021 में इन सात कृषि वस्तुओं के वायदा व्यापार पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया था। दिसंबर 2022 में, इस प्रतिबंध को एक साल के लिए बढ़ाकर दिसंबर 2023 तक कर दिया गया था। समय सीमा समाप्त होने से ठीक पहले, प्रतिबंध को फिर से एक साल के लिए बढ़ा दिया गया था। दिसंबर 2024 में, प्रतिबंध को एक महीने के लिए और फिर 31 मार्च 2025 तक बढ़ा दिया गया था।

क्यों लगाया गया बैन
डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर प्रतिबंध लगाने के पीछे मुख्य तर्क यह था कि इससे महंगाई बढ़ती है। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य कमोडिटी बाजार में स्थिरता लाना और महंगाई व सट्टेबाजी को नियंत्रित करना था। हालांकि, कई रिपोर्ट्स में इस तर्क से अलग राय रखी गई थी। इनमें आईआईटी मुंबई, BIMTECH और आईआईटी खड़गपुर के अध्ययन और 2008 में अर्थशास्त्री अभिजीत सेन की अध्यक्षता में बनी समिति की रिपोर्ट शामिल है। इसके अलावा, 2010 में भारतीय रिजर्व बैंक ने भी 2004 से 2009 के बीच कृषि उत्पादों की कीमतों पर फ्यूचर्स ट्रेडिंग के प्रभाव का अध्ययन किया था। इन सभी रिपोर्टों में यह निष्कर्ष निकाला गया कि फ्यूचर्स ट्रेडिंग सीधे और निश्चित रूप से कीमतों को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार नहीं है। बाकी व्यापार अपने विवेक से करे।

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।