# दालों के उत्पादन बढ़ाने को लेकर सरकार की क्या है तैयारी | जाने क्या क्या मिलेगा प्रोत्साहन
किसान साथियों और व्यापारी भाइयों भारत में दलहन उत्पादन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, क्योंकि यह लगातार तीसरे वर्ष गिरावट दर्ज कर रही है। वर्ष 2024-25 में दलहन उत्पादन अनुमानित रूप से 23 मिलियन टन (एमटी) तक सीमित रह गया, जो 2021-22 के 27.3 मिलियन टन के शिखर से 15 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। यह गिरावट मुख्य रूप से दलहन की खेती के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में भारी कमी के कारण हुई, जो 2021-22 में लगभग 307 लाख हेक्टेयर था, लेकिन 2024-25 में घटकर 255 लाख हेक्टेयर रह गया। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में लगातार वृद्धि और एमएसपी पर खरीद की गारंटी देने के बावजूद, किसान दलहन की खेती को अपनाने के प्रति उत्साहित नहीं हो रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे कम उपज, उत्पादन में अस्थिरता और सिंचाई की सीमित उपलब्धता। विशेष रूप से उरद की खेती का रकबा पिछले तीन वर्षों में 41 प्रतिशत घटकर 46 लाख हेक्टेयर से 27 लाख हेक्टेयर तक सिमट गया। हालांकि, 2024-25 में तुअर, चना और मूंग की खेती के क्षेत्र में क्रमशः 1.6 प्रतिशत, 3.7 प्रतिशत और 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन यह अभी भी 2021-22 के स्तर से काफी कम है।
आयात में वृद्धि और कीमतों पर प्रभाव
देश में दलहन उत्पादन की गिरावट के चलते आयात में भारी वृद्धि हुई है। 2024-25 के अप्रैल-दिसंबर के बीच दलहन आयात 78 प्रतिशत बढ़कर 4.86 मिलियन टन हो गया, जबकि 2023-24 की समान अवधि में यह मात्र 2.8 मिलियन टन था। यदि पूरे कैलेंडर वर्ष 2024 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो कुल आयात 6.8 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो 2023 के 3.6 मिलियन टन की तुलना में 88 प्रतिशत अधिक है। आयात में इस भारी वृद्धि का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार की कीमतों पर पड़ा है। जून 2023 से दलहन की कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई, और यह स्थिति लगभग डेढ़ साल तक बनी रही। विशेष रूप से तुअर (अरहर), उरद (काली दाल) और चना (बंगाल चना) की कीमतों में भारी उछाल आया। हालांकि, दिसंबर 2024 में खरीफ की नई फसल आने के बाद तुअर और उरद की कीमतों में कुछ गिरावट देखी गई, लेकिन फरवरी 2025 में चना की महंगाई दर अभी भी 12 प्रतिशत रही। यह स्थिति केवल बाजार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के पोषण पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। दलहन भारतीय समाज में प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण और किफायती स्रोत हैं। यदि इसकी कीमतें लगातार ऊँची बनी रहती हैं, तो यह पोषण सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती है।
सरकार की पहल और आत्मनिर्भरता मिशन
इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने 2025 के केंद्रीय बजट में "आत्मनिर्भरता मिशन" की घोषणा की है। इस मिशन का लक्ष्य छह वर्षों के भीतर भारत को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत ₹1,000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इस योजना के अंतर्गत सरकार अगले चार वर्षों तक तुअर, उरद और मसूर की सभी उपज को एमएसपी पर खरीदने का आश्वासन दे रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एमएसपी और सरकारी खरीद से समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए व्यापक और ठोस रणनीतियों की आवश्यकता है, जिनमें अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए। नई उन्नत किस्मों के विकास, सिंचाई के साधनों को बढ़ावा देने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने से ही दीर्घकालिक समाधान निकाला जा सकता है।
क्या है दलहन खेती मे चुनौतियाँ
दलहन उत्पादन की गिरावट के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं। इन फसलों की उपज वर्षों से स्थिर बनी हुई है, विशेष रूप से चने को छोड़कर अन्य दालों की उपज में पिछले पाँच दशकों में कोई महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई है। दलहन की खेती मुख्य रूप से असिंचित और निम्न गुणवत्ता वाली भूमि पर की जाती है, जिससे इनकी उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तुअर की सिंचाई का स्तर मात्र 7 प्रतिशत है, जिससे इसके उत्पादन में भारी अस्थिरता बनी रहती है। इसके अलावा, उरद और तुअर जैसी फसलों में फली फूटने (पॉड शैटरिंग) की समस्या भी एक बड़ी चुनौती है। ये फसलें समय पर हाथ से तुड़ाई की मांग करती हैं, लेकिन कटाई के मौसम में मजदूरों की कमी के कारण किसान बड़े नुकसान का सामना करते हैं। इससे वे दलहन की खेती करने से हिचकिचाने लगते हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए शोध और तकनीकी विकास पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। लघु और मध्यम अवधि में किसानों को ऐसी कृषि मशीनों की सुविधा दी जानी चाहिए, जो कटाई को अधिक कुशल और सस्ता बना सकें। दीर्घकालिक समाधान के रूप में ऐसी उन्नत किस्मों का विकास आवश्यक है, जो समान रूप से पकने वाली हों और जिनकी फली फूटने की समस्या न हो।
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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।