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पूर्व में निचले स्तर से 75 रुपये तक तेज हुआ गेहूँ आगे क्या

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 बीते हफ्ते गेहूं का बाजार इस सीजन के सबसे निचले स्तरों पर ₹5- ₹10 के उतार चढ़ाव में काफी संतुलित नजर आया, जहां एक तरफ stockist की मजबूत डिमांड और सरकारी खरीद ने बाजार को सहारा दिया, वहीं दूसरी तरफ KB (ब्लैक सीड) और क्वालिटी की समस्या ने लो क्वालिटी पर दबाव भी बनाए रखा। बता दें कि कोलकाता में निचले स्तर 2575 से ₹75 प्रति क्विंटल बढ़कर 2650 होने के कारण भारतीय गेहूं की कीमतें बांग्लादेश निर्यात के मुकाबले धीरे-धीरे प्रतिस्पर्धा खो रही हैं। लेकिन सटोकियों की खरीद बनी हुई है। शनिवार को दिल्ली में गेहूं का भाव ₹2510, नरेला में ₹2350, नजफगढ़ में ₹2482, कोटा में ₹2325, बीकानेर में ₹2450, जबलपुर में ₹2430, इंदौर में ₹2500, कोलकाता में ₹2650 और हैदराबाद में ₹2760 प्रति क्विंटल रहे। इस समय KB इश्यू बनकर उभरा है, जहां ITC Limited द्वारा 0.10% की सख्त लिमिट लागू होने से कई गाड़ियां सीधे रिजेक्ट हो रही हैं, जिससे किसान और व्यापारी दोनों को परेशानी हो रही है। मंडियों में आवक का ट्रेंड भी बदला है, पहले जहां 1.5 से 2 लाख बोरी रोज आ रही थी, अब सरकारी खरीद शुरू होने के बाद यह घटकर करीब 1 लाख बोरी रह गई है, लेकिन बारां मंडी मे रोजाना करीब 2 से 2.5 लाख कट्टे सरकारी सेंटर पर जा रहे हैं। मौसम ने भी इस बार खेल बिगाड़ा है,
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बारिश और ओलावृष्टि से करीब 2.49 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है, जिससे क्वालिटी कमजोर और नमी ज्यादा देखने को मिल रही है हालांकि अच्छी क्वालिटी वाला गेहूं प्रीमियम पर बिक रहा है। करीब 120 मिलियन टन के उत्पादन अनुमान में लगभग 2% तक कमी की आशंका है। कई राज्यों में अभी केवल 25-30% कटाई ही पूरी हुई है, इसलिए आगे सप्लाई का असली दबाव अभी बाकी है। ग्लोबल मार्केट में भी हलचल बनी हुई है, मिडिल ईस्ट तनाव, रूस की सप्लाई दिक्कत और अर्जेंटीना में तेजी के कारण माहौल अनिश्चित है, लेकिन भारत कम फ्रेट के कारण एक मजबूत सप्लायर बनकर उभर सकता है, फरवरी में 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन आटा निर्यात की अनुमति के बाद एक्सपोर्ट डिमांड धीरे-धीरे एक्टिव हो सकती है। डिमांड साइड की बात करें तो Britannia Industries, Olam International और Cargill जैसी बड़ी कंपनियां लगातार खरीद में एक्टिव हैं, जबकि मिलर्स के पास सीमित स्टॉक होने से बाजार में सपोर्ट बना हुआ है। कुल मिलाकर सरकारी खरीद, सीमित आवक और मजबूत इंडस्ट्री डिमांड और निर्यात डिमांड तेजी को सपोर्ट कर रही है। जबकि कमजोर क्वालिटी और आगे बढ़ती आवक अगले कुछ दिनों में थोड़ा बहुत दबाव बना सकते हैं। लेकिन यदि गिरावट आती है तो यह खरीदारी का मौका बन सकता है। चाहें तो आप मौजूदा भावों पर खरीद बना सकते हैं क्योंकि यहाँ से आगे 50 रुपये से ज्यादा गिरावट का रिस्क नहीं दिख रहा। जिस तरह से युद्ध का तनाव बना हुआ है और क्रूड के भाव बढ़े हुए हैं उसे देखते हुए आगे चलकर ट्रांसपोर्ट महंगा हो सकता है इसलिए अभी से खरीद कर लेनी चाहिए व्यापार अपने विवेक से करें।

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।