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क्या है गेहूं में तेजी की असली वज़ह | जानें इस रिपोर्ट में

क्या है गेहूं में तेजी की असली वज़ह | जानें इस रिपोर्ट में

सरकार द्वारा विगत 8 महीने से गेहूं की महंगाई को रोकने के लिए तरह- तरह के सकारात्मक प्रयोग किए जाते रहे हैं, जिसके चलते बढ़ती महंगाई रुक गई थी तथा आम उपभोक्ताओं को इस बार भरपूर राहत मिली थी, लेकिन पिछले एक सप्ताह से टेंडर में गेहूं की बिक्री फिर से बंद हो जाने से बाजार में महंगाई भड़क गई है। अतः सरकार को नया गेहूं का दबाव बनने से पहले मंडियों में गेहूं की आपूर्ति बनाई रखनी चाहिए अन्यथा 100 रुपए की और तेजी आ सकती है। WhatsApp पर भाव देखने के लिए हमारा ग्रुप जॉइन करें

सरकार द्वारा विगत 8 महीने से महंगाई को पूरी तरह नियंत्रित किया गया था तथा टेंडर द्वारा गेहूं की बिक्री सस्ते भाव में किए गए, जिसके चलते 2900 रुपए प्रति क्विंटल ऊपर में गेहूं बिकने के बाद नीचे में ठीक एक सप्ताह पहले 2400 रुपए के निम्न स्तर पर आ गया था, लेकिन सरकार द्वारा किसानों का नया गेहूं एमपी में शुरू होते ही टेंडर में बेचे जाने वाले साप्ताहिक गेहूं की बिक्री रोक दिए जाने की चर्चा आते ही बाजार भड़कते चले गए तथा एक सप्ताह के अंतराल 2400/2410 रुपए से बढ़कर 2750 रुपए प्रति क्विंटल की ऊंचाई पर आमदनी वाला गेहूं पहुंच गया है। गौरतलब है कि गेहूं की बिजाई यूपी हरियाणा पंजाब राजस्थान मध्य प्रदेश बिहार सहित सभी उत्तर भारत के उत्पादक क्षेत्रों में रिकॉर्ड स्तर पर हुई है तथा मौसम भी अनुकूल है, जिससे अभी तक खड़ी फसल को देखते हुए इसका उत्पादन 1120 लाख मैट्रिक टन होने का ताजा अनुमान आने लगा है। सस्ते में अनाज खरीदना है तो यहां देखें कहां के लिए निकली है अनाज रेक

यह उत्पादन गत वर्ष 1100 लाख मीट्रिक टन के करीब रह गया था । हम मानते हैं कि गेहूं का उत्पादन बढ़ने के बावजूद भी गत सीजन में गेहूं की खरीद लक्ष्य से कम रही, लेकिन वर्ष 2022-23 की तुलना में अधिक रहा है। उक्त विपणन वर्ष में 188 लाख मीट्रिक टन रह गया था, जबकि गेहूं की खरीद पिछली बार 262 लाख मैट्रिक टन के करीब हुआ था। इस बार सरकार द्वारा 332 लाख मैट्रिक टन का खरीद लक्ष्य रखा गया है। अब देखना यह है कि खरीद लक्ष्य तक सरकार कितना पहुंच पाती है। सरकार को अभी टेंडर में गेहूं की बिक्री 2150 रुपए प्रति क्विंटल के भाव में 31 मार्च तक देना चाहिए था, इसका लाभ यह मिलने की है कि मंडियों में गेहूं के भाव नीचे होने पर सरकार को खरीद लक्ष्य तक पहुंचने में आसानी रहती

वास्तविकता यह है कि जब मंडियों में गेहूं के ऊंचे भाव हो जाएंगे तो सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मिलना मुश्किल रहेगा। अतः गेहूं की बिक्री टेंडर में किए जाने के दो लाभ सरकार को मिलते। पहला यह की महंगाई नियंत्रित रहती, दूसरा यह की सरकार को लक्ष्य हेतु किसान सरकारी धर्म कांटे पर अधिक लाएंगे । अतः सरकार को कम से कम 31 मार्च तक साप्ताहिक टेंडर 2150 रुपए में जारी रखना चाहिए था। टेंडर बंद होने की खबर मिलते ही स्टॉकिस्ट एवं रोलर फ्लोर मिलें लिवाली में आ गई है, जिससे एक सप्ताह के अंतराल 2400 रुपए से बढ़कर 2750 रुपए भाव हो गए हैं तथा सरकार शीघ्र इस पर कार्यवाही नहीं करेगी, तो यह 2900 रुपए दोबारा बन जाएगा।

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मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।