तनाव घटने के बाद बदल सकती हैं चावल के बाजार की तसवीर - रिपोर्ट
Mar 10, 2026, 11:15 IST
वैश्विक चावल व्यापार इस समय काफी उतार-चढ़ाव वाले दौर से गुजर रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने चावल व्यापार की दिशा बदल दी है, जिसका सबसे ज्यादा असर भारतीय बासमती एक्सपोर्ट पर पड़ता दिख रहा है। आंकड़ों के अनुसार भारत के 5% टूटे हुए पैराबोइल्ड चावल की कीमत इस सप्ताह घटकर लगभग $348 से $353 प्रति मीट्रिक टन रह गई, जबकि पिछले सप्ताह यह करीब $350 से $356 प्रति टन थी। इसी तरह भारत के 5% टूटे हुए सफेद चावल का भाव लगभग $346 से $351 प्रति टन के आसपास दर्ज किया गया। कीमतों में यह गिरावट देश में मौजूद सरप्लस सप्लाई और रुपए की कमजोरी की वजह से देखने को मिल रही है। रुपए के कमजोर होने से जो अतिरिक्त मार्जिन बन रहा है उसका कुछ फायदा विदेशी खरीदारों को भी दिया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग अभी भी सुस्त बनी हुई है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ईरान-इजराइल तनाव के कारण करीब 4 लाख टन बासमती चावल पोर्ट और ट्रांजिट में फंसा हुआ बताया जा रहा है, जिससे नई एक्सपोर्ट डील्स भी धीमी पड़ गई हैं। इसके अलावा शिपिंग पर असर पड़ने से फ्रेट रेट अमेरिका के मुकाबले दो गुने से भी ज्यादा हो गए हैं, जिससे निर्यात लागत काफी बढ़ गई है।
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मिडिल ईस्ट भारत के लिए बेहद अहम बाजार है क्योंकि यहां विशेष रूप से बासमती चावल की भारी मांग रहती है और केवल ईरान ही भारत के कुल बासमती निर्यात का लगभग 12.6% हिस्सा खरीदता है। इसलिए मौजूदा तनाव का सीधा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ रहा है। उधर अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है। वियतनाम का 5% टूटे हुए चावल का रेट $360 से $365 प्रति टन पर स्थिर बना हुआ है और पिछले सप्ताह की तुलना में इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। शुरुआती शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक फरवरी महीने में दक्षिणी वियतनाम के बंदरगाहों से लगभग 3,82,000 टन चावल लोड किया गया, जिसमें से ज्यादातर शिपमेंट फिलीपींस और अफ्रीका भेजी गई। हालांकि मिडिल ईस्ट के हालात के कारण अफ्रीका जाने वाले जहाजों पर भी इंश्योरेंस और फ्यूल कॉस्ट बढ़ने से शिपिंग महंगी हो गई है। यही वजह है कि केवल भारत ही नहीं बल्कि वियतनाम और थाईलैंड जैसे बड़े निर्यातकों को भी खाड़ी देशों में चावल भेजने में कुछ लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। साल की शुरुआत में भारत से चावल निर्यात की रफ्तार बेहतर दिखाई दे रही थी, लेकिन पिछले करीब 10 दिनों में मिडिल ईस्ट की स्थिति ने बाजार का माहौल बदल दिया है। अब निर्यातक आगे की जानकारी के लिए whatsapp ग्रुप जॉइन करे (9306639343) की कोशिश कर रहे हैं, ताकि आने वाले समय में चावल व्यापार को स्थिर रखा जा सके। चावल की रेगुलर सर्विस के लिए 9306639343 पर मैसेज करें।
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मिडिल ईस्ट भारत के लिए बेहद अहम बाजार है क्योंकि यहां विशेष रूप से बासमती चावल की भारी मांग रहती है और केवल ईरान ही भारत के कुल बासमती निर्यात का लगभग 12.6% हिस्सा खरीदता है। इसलिए मौजूदा तनाव का सीधा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ रहा है। उधर अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है। वियतनाम का 5% टूटे हुए चावल का रेट $360 से $365 प्रति टन पर स्थिर बना हुआ है और पिछले सप्ताह की तुलना में इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। शुरुआती शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक फरवरी महीने में दक्षिणी वियतनाम के बंदरगाहों से लगभग 3,82,000 टन चावल लोड किया गया, जिसमें से ज्यादातर शिपमेंट फिलीपींस और अफ्रीका भेजी गई। हालांकि मिडिल ईस्ट के हालात के कारण अफ्रीका जाने वाले जहाजों पर भी इंश्योरेंस और फ्यूल कॉस्ट बढ़ने से शिपिंग महंगी हो गई है। यही वजह है कि केवल भारत ही नहीं बल्कि वियतनाम और थाईलैंड जैसे बड़े निर्यातकों को भी खाड़ी देशों में चावल भेजने में कुछ लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। साल की शुरुआत में भारत से चावल निर्यात की रफ्तार बेहतर दिखाई दे रही थी, लेकिन पिछले करीब 10 दिनों में मिडिल ईस्ट की स्थिति ने बाजार का माहौल बदल दिया है। अब निर्यातक आगे की जानकारी के लिए whatsapp ग्रुप जॉइन करे (9306639343) की कोशिश कर रहे हैं, ताकि आने वाले समय में चावल व्यापार को स्थिर रखा जा सके। चावल की रेगुलर सर्विस के लिए 9306639343 पर मैसेज करें।
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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।
