खाड़ी में तनाव बढ़ा, तेल सप्लाई पर खतरा
Mar 20, 2026, 09:39 IST
19 मार्च 2026 को मुंबई से आई इस बड़ी geopolitical खबर में मध्य-पूर्व का माहौल काफी गर्म नजर आया, जहां 18 मार्च को रियाद में हुई एक अहम मीटिंग में कई देशों के विदेश मंत्रियों ने मिलकर ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। इस बैठक में अज़रबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्किये और यूएई जैसे कुल 13 देशों ने हिस्सा लिया और साफ शब्दों में कहा कि हाल के दिनों में ईरान द्वारा अलग-अलग देशों में किए गए हमले क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ, जिनका निशाना आम नागरिक इलाकों के साथ-साथ तेल सुविधाएं, डीसैलिनेशन प्लांट, एयरपोर्ट, रिहायशी इमारतें और यहां तक कि राजनयिक ठिकाने भी बने, जिससे हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। सभी देशों ने एकजुट होकर कहा कि इस तरह की कार्रवाई किसी भी हालत में जायज नहीं ठहराई जा सकती और प्रभावित देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है।
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साथ ही ईरान से तुरंत सभी हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की अपील की गई। बैठक में खास तौर पर UN Security Council Resolution 2817 (2026) का जिक्र करते हुए ईरान को क्षेत्र में किसी भी सशस्त्र समूह को समर्थन न देने और तुरंत संघर्ष विराम करने को कहा गया। समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई, खासकर Hormuz जलडमरूमध्य और Bab al-Mandab जैसे अहम रूट्स पर संभावित खतरे को लेकर, क्योंकि यहां किसी भी रुकावट का सीधा असर global oil supply और कीमतों पर पड़ सकता है। लेबनान की संप्रभुता को समर्थन देते हुए वहां सरकार के हथियार नियंत्रण प्रयासों की सराहना की गई, वहीं इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर भी चिंता जताई गई जिससे तनाव और बढ़ सकता है। सभी देशों ने एक दूसरे की हां में हां मिलाते हुए कहा कि अगर ईरान ने अपने रवैये में बदलाव नहीं किया तो आने वाले समय में उसके साथ संबंधों पर असर पड़ सकता है, जबकि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आगे की जानकारी के लिए whatsapp ग्रुप जॉइन करे (9306639343) भी कही गई, क्योंकि मौजूदा हालात का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि global energy market, oil prices और inflation पर भी सीधा दबाव बना सकता है।
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साथ ही ईरान से तुरंत सभी हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की अपील की गई। बैठक में खास तौर पर UN Security Council Resolution 2817 (2026) का जिक्र करते हुए ईरान को क्षेत्र में किसी भी सशस्त्र समूह को समर्थन न देने और तुरंत संघर्ष विराम करने को कहा गया। समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई, खासकर Hormuz जलडमरूमध्य और Bab al-Mandab जैसे अहम रूट्स पर संभावित खतरे को लेकर, क्योंकि यहां किसी भी रुकावट का सीधा असर global oil supply और कीमतों पर पड़ सकता है। लेबनान की संप्रभुता को समर्थन देते हुए वहां सरकार के हथियार नियंत्रण प्रयासों की सराहना की गई, वहीं इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर भी चिंता जताई गई जिससे तनाव और बढ़ सकता है। सभी देशों ने एक दूसरे की हां में हां मिलाते हुए कहा कि अगर ईरान ने अपने रवैये में बदलाव नहीं किया तो आने वाले समय में उसके साथ संबंधों पर असर पड़ सकता है, जबकि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आगे की जानकारी के लिए whatsapp ग्रुप जॉइन करे (9306639343) भी कही गई, क्योंकि मौजूदा हालात का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि global energy market, oil prices और inflation पर भी सीधा दबाव बना सकता है।
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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।
