युद्ध का असर, निर्यात कारोबार संकट में
Mar 17, 2026, 11:29 IST
दोस्तों पश्चिम एशिया में चल रहे भारी तनाव ने दुनिया भर के आयात निर्यात को प्रभावित किया है, जिसका असर भारतीय कृषि निर्यात पर भी देखा जा रहा है, खासकर जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच पिछले 18 दिनों से जारी संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट और खाड़ी क्षेत्र के समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे भारत के कुल निर्यात का करीब 70% हिस्सा प्रभावित हो चुका है और केवल 30% शिपमेंट ही किसी तरह चल पा रहा है, वह भी काफी बाधाओं के साथ। इस पूरे हालात में सबसे बड़ी परेशानी शिपमेंट में देरी, बीच रास्ते से जहाजों की वापसी और तेजी से बढ़ते खर्च के रूप में सामने आ रही है, क्योंकि कंटेनर का किराया लगभग 300% तक बढ़ चुका है,
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जिससे निर्यातकों की लागत अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है और मुनाफा बुरी तरह दबाव में आ गया है। कई जहाज बंदरगाहों और समुद्र के बीच फंसे हुए हैं, जिससे सप्लाई चेन पूरी तरह गड़बड़ा गई है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोलियम के वैश्विक दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन और महंगा होता जा रहा है, जो इस संकट को और गहरा बना रहा है। सरकार ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे कुछ खेपों को वैकल्पिक बाजारों में डायवर्ट करने की कोशिश करें, लेकिन यह इतना आसान नहीं है क्योंकि शिपिंग कंपनियां रूट बदलने की जिम्मेदारी लेने से बच रही हैं और इससे व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई है। इस पूरे घटनाक्रम का असर खास तौर पर बासमती चावल, चाय, कॉफी, मसाले, फल-सब्जियां, चीनी और ऑयल मील जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों के निर्यात पर साफ दिख रहा है, जहां डील्स अटक रही हैं और नए ऑर्डर लेने में भी हिचकिचाहट बढ़ रही है। कुल मिलाकर आगे की जानकारी के लिए whatsapp ग्रुप जॉइन करे (9306639343) से गुजर रहे हैं, जहां माल तैयार है लेकिन रास्ता बंद है, लागत बढ़ रही है और बाजार तक पहुंचना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे पूरे कृषि व्यापार सेक्टर में दबाव और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।
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जिससे निर्यातकों की लागत अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है और मुनाफा बुरी तरह दबाव में आ गया है। कई जहाज बंदरगाहों और समुद्र के बीच फंसे हुए हैं, जिससे सप्लाई चेन पूरी तरह गड़बड़ा गई है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोलियम के वैश्विक दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन और महंगा होता जा रहा है, जो इस संकट को और गहरा बना रहा है। सरकार ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे कुछ खेपों को वैकल्पिक बाजारों में डायवर्ट करने की कोशिश करें, लेकिन यह इतना आसान नहीं है क्योंकि शिपिंग कंपनियां रूट बदलने की जिम्मेदारी लेने से बच रही हैं और इससे व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई है। इस पूरे घटनाक्रम का असर खास तौर पर बासमती चावल, चाय, कॉफी, मसाले, फल-सब्जियां, चीनी और ऑयल मील जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों के निर्यात पर साफ दिख रहा है, जहां डील्स अटक रही हैं और नए ऑर्डर लेने में भी हिचकिचाहट बढ़ रही है। कुल मिलाकर आगे की जानकारी के लिए whatsapp ग्रुप जॉइन करे (9306639343) से गुजर रहे हैं, जहां माल तैयार है लेकिन रास्ता बंद है, लागत बढ़ रही है और बाजार तक पहुंचना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे पूरे कृषि व्यापार सेक्टर में दबाव और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।
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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।
