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India Rice Export Report : क्या कहते हैं पिछली तिमाही के बासमती निर्यात के आंकड़े | जाने (अक्टूबर-दिसम्बर 2024) तिमाही में बासमती का निर्यात बढ़ा या घटा

India Rice Export Report : क्या कहते हैं पिछली तिमाही के बासमती निर्यात के आंकड़े | जाने (अक्टूबर-दिसम्बर 2024) तिमाही में बासमती का निर्यात बढ़ा या घटा
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किसान साथियो और व्यापारी भाइयो चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसम्बर 2024) में भारत से बासमती चावल का निर्यात उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2024 में बासमती चावल का निर्यात लगभग 51 करोड़ डॉलर रहा, जो नवंबर में घटकर लगभग 38 करोड़ डॉलर हो गया। हालांकि, दिसंबर में इसमें फिर से उछाल आया और यह 56.20 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। घरेलू बाजार में बासमती धान की नई फसल सितंबर के आखिरी सप्ताह में आनी शुरू हो गई थी, लेकिन अक्टूबर-दिसंबर में इसकी आपूर्ति में तेजी आई।  चावल के लाइव भाव देखने के लिए लिंक पर क्लिक करे

केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ निकाय, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान वित्त वर्ष (2024-25) के आरंभिक नौ महीनों में यानी अप्रैल-दिसम्बर 2024 के दौरान देश से बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 42.40 लाख टन पर पहुंच गया जो अप्रैल-दिसम्बर 2023 के शिपमेंट 35.40 लाख टन से 7 लाख टन अधिक रहा। इसके फलस्वरूप इसी अवधि में बासमती चावल के निर्यात से प्राप्त आमदनी भी 3.97 अरब डॉलर से 35 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.32 अरब डॉलर पर पहुंच गई।

उद्योग समीक्षकों के अनुसार, यदि 950 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) बना रहता, तो चालू वित्तीय वर्ष में बासमती चावल के निर्यात में गिरावट आ सकती थी, या यह पिछले वित्तीय वर्ष के बराबर ही रहता। हालांकि, एमईपी के हटने से भारतीय निर्यातकों को कम कीमतों पर बासमती चावल के निर्यात अनुबंध और शिपमेंट करने का अवसर मिल गया है। इससे निर्यातकों को बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने और अधिक मात्रा में चावल निर्यात करने में मदद मिल रही है।  नोट :- अगर आपको धान, चावल, सरसों, सोयाबीन, और चना के लाइव भाव whatsapp पर चाहिए तो आप 500 रुपए दे कर 6 महीनो तक लाइव भाव की सर्विस ले सकते है | जिन्हे लेनी है वही व्हाट्सअप पर मैसेज करे 9518288171 इस नंबर पर खाली भाव पूछने के लिए काल या मैसेज ना करे  |

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कई निर्यातकों को अनावश्यक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए सरकार को कम कीमत पर चावल निर्यात करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। बासमती चावल एक उच्च गुणवत्ता वाला उत्पाद है और इसकी प्रतिष्ठा बनाए रखना महत्वपूर्ण है। न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) हटाए जाने के बाद, बासमती चावल के निर्यात प्रस्ताव मूल्य में लगभग 250 डॉलर प्रति टन की भारी गिरावट आई है। इसके परिणामस्वरूप, घरेलू बाजार में बासमती धान की कीमतों में भी अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। कुल मिलाकर, चावल के निर्यात राजस्व में कमी आ रही है। बाकि व्यापार अपने विवेक से करे

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।