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बासमती धान रखा हुआ है तो ये रिपोर्ट जरूर देख लें | बासमती तेजी मंदी रिपोर्ट 01 मार्च 2024

बासमती धान रखा हुआ है तो ये रिपोर्ट जरूर देख लें | बासमती तेजी मंदी रिपोर्ट 01 मार्च 2024

किसान साथियो बासमती किसानों के लिए यह साल पिछले सालों जैसा नहीं है। बासमती के भाव में कई बार उछाल और कई बार गिरावट देखी गई है। उछाल केवल 1 दिसंबर तक ही देखने को मिला था उसके बाद से ही लाल सागर के रूट पर आ रही समस्याओं के कारण बासमती के भाव में लगातार कमजोरी बनी हुई है। पिछले कुछ सालों के ट्रेंड को देखते हुए काफी किसानों ने माल को होल्ड कर लिया है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय कारणों और पाकिस्तान से मिल रहे कड़े मुकाबले के कारण पहले से महंगे भाव पर खरीदा गया बासमती निर्यातकों और मिलर्स के गले की हड्डी बनता दिख रहा है। अब बासमती के भाव की तेजी मंदी को लेकर जानकारों की राय में अन्तर देखने को मिल रहा है। आज की रिपोर्ट में हम बासमती के बाजार की सभी खबरों को कवर करेंगे और स्थिति का सही आकलन करने की कोशिश करेंगे। WhatsApp पर भाव देखने के लिए हमारा ग्रुप जॉइन करें

साथियो पिछले कई साल से लगातार बासमती के निर्यात में वृद्धि हो रही है। पिछले साल बासमती निर्यात 44 लाख टन अधिकतम औसत से बढ कर 49 लाख टन से अधिक हो गया। दूसरी तरफ भारत के बढ़ते निर्यात से पड़ोसी देश पाकिस्तान ने उत्पादन में बढ़ोतरी के चलते भारत की तुलना में कम कीमतों में बासमती चावल की पेशकश कर रहा है। जिसके चलते कुछ समय के लिए आयातकों का रूझान पाकिस्तान की तरफ मुड़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में जब अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की स्थिति खराब चल रही है पाकिस्तान से मिल रहा कॉम्पिटिशन भारतीय बासमती पर दबाव बना रहा है।

बासमती चावल को लेकर उद्योग के अधिकारियों ने बताया कि प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान उत्पादन में उछाल के बीच काफी प्रतिस्पर्धी दाम पर चावल ऑफर कर रहा है। ऐसे में भारत के बासमती चावल का निर्यात प्रभावित हो सकता है। निर्यात में गिरावट आने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल पाकिस्तान से कम सप्लाई और आयातक देशों द्वारा भंडारण की कोशिशों के चलते भारत का बासमती चावल का निर्यात एक साल पहले की तुलना में 11.5 % बढ़कर 2023 में 4.9 मिलियन मीट्रिक टन हो गया था, जो कि साल 2020 में 5 मिलियन टन के रिकॉर्ड उच्च स्तर से कुछ ही कम है। सरकारी आंकड़े यह भी बताते हैं कि ऊंची कीमतों के चलते, बासमती चावल शिपमेंट ने दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक को साल 2023 में रिकॉर्ड 5.4 बिलियन डॉलर जुटाने में मदद की, जो पिछले साल से लगभग 21% ज्यादा है।

आल इंडिया राइस एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्री विजय सेतिया ने कहा कि पिछले साल, जब पाकिस्तान उत्पादन के मुद्दों का सामना कर रहा था, तब खरीदार स्टॉक करने के लिए भागम- भाग कर रहे थे। हालांकि, इस साल, उत्पादन में बढ़ोतरी के चलते पाकिस्तान भारत की तुलना में कम कीमतों की पेशकश कर रहा है।

पाकिस्तान की एजेन्सी राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (REP) के अध्यक्ष चेला राम केवलानी ने पिछले महीने कहा था कि वित्त वर्ष 2023-24 में इस्लामाबाद का कुल चावल निर्यात बढ़कर 5 मिलियन टन हो सकता है, जो पिछले साल के 3.7 मिलियन टन से ज्यादा है।

KRBL लिमिटेड के निर्यात प्रमुख अक्षय गुप्ता का कहना है कि पाकिस्तानी रुपये के मूल्यह्रास ने पाकिस्तान के निर्यात को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है। भारत में बासमती चावल के उत्पादन में अनुमानित 10% की वृद्धि के बीच निर्यात मांग में कमी के चलते देश में बासमती की कीमतों में गिरावट दिख रही है। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा एकत्र किए आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय बासमती चावल के सबसे बड़े खरीदार ईरान ने 2023 में खरीद में 36% की कमी की है, लेकिन इराक, ओमान, कतर और सऊदी अरब को हाई शिपमेंट ने कमी को पूरा कर दिया। यह भी संभावना है कि ईरान पिछले साल की कमी को पूरी करने की कोशिश करे। दिल्ली के निर्यातक ने बताया कि निकट अवधि में इसमें और गिरावट आ सकती है क्योंकि लाल सागर के जरिये शिपिंग में व्यवधान के कारण माल ढुलाई लागत में बढ़ोतरी के चलते खरीदार खरीदारी में देरी कर रहे हैं। बहरहाल आने वाले समय में बासमती के बाजार में आने वाली तेजी मंदी लाल सागर के रूट पर शांति बहाली की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। व्यापार अपने विवेक से करें

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किसान साथियो भारत देश से हर साल लगभग 45 लाख  टन बासमती चावल का निर्यात होता है, हालांकि कोरोना काल के दौरान इसमें बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी लेकिन उसके बाद साल 2022 और 2023 के दौरान बढ़े निर्यात ने फिर से निर्यातकों के हौंसले बुलंद किए हैं। जैसा कि आप सबको पता है कि पिछले कुछ दिनों से चल रहे लाल सागर रूट के संघर्ष ने इस साल बासमती के बाजार को काफी नुकसान पहुंचाया है। एक तरफ जहां बासमती के जहाजों को अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाना पड़ रहा है वहीँ दूसरी तरफ समय भी ज्यादा लग रहा है। जहाजों के किराये महंगे हो गए हैं। जहाजों का बीमा महंगा हो गया है और पेट्रोलियम के दाम भी बढ़ गए हैं। इन असर यह देखने को मिल रहा है कि निर्यातकों ने कुछ दिन के लिए माल को होल्ड कर लिया है। यही कारण है कि बासमती धान का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल तक टूट चुका है।

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।