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गल फ़ूड मेला हुआ समाप्त | जानिए कैसा रहा बासमती का रूझान। अब क्या रह सकती है बाजार की दिशा दशा

गल फ़ूड मेला हुआ समाप्त | जानिए कैसा रहा बासमती का रूझान। अब क्या रह सकती है बाजार की दिशा दशा

किसान साथियो जैसा कि कई दिन से माहौल बना हुआ है कि गल फ़ूड मेले के चलते बासमती के बाजार की तस्वीर बदल सकती है। हालांकि मेले के समाप्ति के बाद जो रूझान निकलकर सामने आ रहे हैं वे उतने उत्साहजनक नहीं दिखाई देते। पिछले दो महीने से भारतीय घरेलू बाज़ार में बासमती चावल के भाव में गिरावट का सिलसिला जारी है। बासमती के किसानों, मिलर्स और निर्यातकों की बीते कुछ दिनों से दुबई Gulfood fair पर नजरे टिकी थी भारतीय चावल कारोबारियों की काफी हद तक बड़े निर्यात ऑर्डर मिलने की उम्मीदें थीं लेकिन बीते पांच दिन से चल रहे दुबई फेयर का कल समापन हो गया जिसमे भारतीय चावल की सुस्त मांग देखने को मिली है। यह फिर यूँ कहा जा सकता है कि सुस्त मांग के चलते ऊंचे भाव में खरीदार नज़र नहीं आए WhatsApp पर भाव देखने के लिए हमारा ग्रुप जॉइन करें

क्या मिल रहे हैं अंतर्राष्ट्रीय भाव
दोस्तो दुबई मेले में 1121 स्टीम 1180/1200$, बासमती 1718 स्टीम में 1080/1100$, बासमती 1509 स्टीम में 1000/1020$ तक, 1401 स्टीम में 1080/1100$ कुछ कारोबार हुए हैं। इसके अलावा 1121 सेला में 1075/1090$, 1718 सेला में 1000/1025$, 1509 सेला में 925/940$ और डीपी पूसा ब्राउन 880/900$ क्वालिटी के अनुसार कुछ हद तक कारोबार हुए हैं। जबकि blending क्वालिटी के सौदे इनसे भी 50/60 डॉलर घटकर हुए हैं। ऊंचे रेट्स न मिलने के कारण कुछ निर्यातकों ने डील्स करना मुनासिब नहीं समझा और मार्केट को wait and watch करना बेहतर समझा। बासमती के कुछ बड़े जानकारों का मत है कि दुबई मेले में अच्छा रिज़ल्ट न मिलने के चलते घरेलू बाज़ार में बासमती चावल की सभी किस्मों में 200/300 रुपए की गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि कुछ दूसरे व्यापारियों का मानना है कि न्यू क्रॉप आने में अभी सात महीने का लंबा समय बचा है इसलिए बीच बीच में बाज़ार में सुधार देखने को मिलता रहेगा।

उत्पादन ज्यादा निर्यात में अड़चन
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बासमती प्रजाति के सभी धान का उत्पादन इस बार अधिक रहा है। इसके अलावा भारतीय चावल की अपेक्षा दूसरे पड़ोसी देशों के चावल सस्ते पड़ रहे हैं, जिसके चलते भारतीय निर्यातकों में बहुत ज्यादा उत्साह नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर हृती विद्रोहियों के आतंक से भी समुद्री रास्ते पर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। निर्यात शिपमेंट में काफी विलंब हुआ है। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में बासमती प्रजाति के सभी चावल में लंबी तेजी तो नहीं लग रही है। साथियो जैसा कि हमने बताया कि इस सीज़न में बासमती धान का उत्पादन हरियाणा पंजाब यूपी राजस्थान मध्य प्रदेश आदि राज्यों में अधिक हुआ है। बीते साल की तेजी को देखकर इस बार सीजन पर ही स्टॉकिस्ट एवं राइस मिलर्स दोनों ही प्रतिस्पर्धात्मक खरीद करने लगे थे, जिससे तेजी की आग वाले भाव बन गए थे। हालांकि पिछले दिनों घटे घटनाक्रम के कारण निर्यात में दिन प्रतिदिन गिरावट आने लगी है, जिससे सीजन के ऊंचे वाले भाव अब तक दिखाई नहीं दिए हैं ।

वर्तमान में क्या है बाजार का स्टेट्स
वर्तमान में राइस मिलों एवं स्टॉकिस्टों के पास ऊंचे भाव के धान फंसे हुए हैं, जो ब्याज भाड़ा लगाकर काफी महंगे पड़ रहे हैं। दूसरी ओर निर्यात जनवरी के महीने में 27-28 प्रतिशत के करीब कम रहा है। इसका कारण यह है कि पाकिस्तान में 1509 एवं 1718 सहित सभी प्रजाति के बासमती चावल के भाव घरेलू मंडियों की अपेक्षा काफी सस्ते चल रहे हैं। यही वज़ह है कि पाकिस्तानी निर्यातकों ने ईरान सहित अन्य खाड़ी के देशों के लिए निर्यात सौदे भारी मात्रा में सस्ते भाव पर बुक कर लिए हैं। इस वजह से भारतीय चावल का निर्यात प्रभावित हुआ है। दूसरा एक और कारण यह है कि पिछले दो महीने से लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा आतंक फैलाए जाने से निर्यातक डरे हुए हैं तथा उनके पास गांधीधाम कांडला सहित विभिन्न बंदरगाहों पर माल पड़े हुए हैं, जिससे बाजार में ग्राहक की भारी कमी बनी हुई है।

रोके या बेचे
साथियो आपने देखा होगा कि पिछले पखवाड़े के अंतराल में 1121 एवं 1509 सहित सभी धान के भाव में 200 से 250 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है। बासमती सेला चावल भी ऊपर के भाव से 200 तथा स्टीम में 300/350 रुपए प्रति क्विंटल की भारी गिरावट आ गई है। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए कहा जा सकता है कि जब तक निर्यात उद्योग में पाकिस्तान के सस्ते चावल निर्यात होते रहेंगे, तब तक भारतीय चावल की गति नहीं दिखाई दे रही है। अतः फिलहाल निकट भविष्य में तेजी का व्यापार नहीं करना चाहिए। दूसरी ओर सरकार की दृष्टि भी महंगाई एवं जमाखोरी को रोकने के तरफ है यह भी कुछ दिन और मंदे का कारण रहेगा। वही मिलिंग पड़ता काफी महंगा होने तथा धान की आवक समास हो जाने से यहां से आगे बड़ा रिस्क तो दिखाई नहीं दे रहा है लेकिन लंबी तेजी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।