खल के बाजार की बदल सकती है दिशा | तेजी की तरफ लौट सकता है बाजार | जाने क्या है इसकी वज़ह

 

किसान साथियों और व्यापारी भाइयों जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेरिफ वॉर चल रहा है उसे देखते हुए सरसों, सोयाबीन, चना आदि के बाजार को लेकर कुछ भी रेकमेंड करना तर्कसंगत नहीं है। लेकिन कुछ ऐसी जानकारियां जरूर हैं जो आपके लिए खऱीदने और बेचने के निर्णय से पहले आपको जान लेनी चाहिए। साथियों अमेरिका के राष्ट्रपति ने घोषणा की है कि 75 देश के लिए हाल ही में लगाए गए टैरिफ को 90 दिन के लिए स्थगित किया जाएगा। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया कि यह 75 देश कौन से हैं लेकिन ऐसा लगता है कि इस लिस्ट में चीन को छोडकर ज्यादातर देश शामिल हो जाएंगे। इसे विश्व व्यापार के लिए सुखद समाचार माना जा रहा है इसीलिए विदेशी बाजारों में तेजी देखने को मिल रही है। जहां तक घरेलू सरसों बाजार की बात है हमने कल बताया था कि बाजार स्थिर से हल्का कमजोर रहेगा शाम को ठीक यही देखने को मिला। जयपुर में भाव 6350 पर  स्थिर तो भरतपुर और सलोनी प्लान्ट पर 50 से 75 तक कमजोर रहे। साथियो सरसों की दैनिक आवक 8 लाख बोरी के आसपास हो रही है। जो कि पिछले साल के बराबर ही है। हालांकि इस साल डिमांड के मुकाबले में आवक कमजोर दिख रही है इसलिए सरसों का बाजार मजबूती से खड़ा हुआ है। जयपुर में इस समय 6350 के भाव हैं और 6400 पर एक बड़ा रेजिस्टेंस है इसी तरह से भरतपुर में भी 6050 एक रेजिस्टेंस के तौर कर काम कर रहा है। अगर आज ये दोनों लेवल पार होते हैं तो आगे की तेजी का रास्ता खुल जाएगा। मौजूदा परिस्थियों में बड़ी तेजी या बड़ी मंदी नहीं दिखती। व्यापारी साथी चाहें तो सरसों की हर गिरावट पर खऱीद करते रहे। क्योंकि आगे चलकर तेजी बन सकती है। व्यापार अपने विवेक से करें।  अगर आप भी मंडी बाजार से जुड़े हैं और आपको रोजाना भाव और आगे का अनुमान साथ में आयात-निर्यात से संबंधित जानकारी चाहते हैं, तो हमारी प्रीमियम सेवा मात्र ₹500 में 6 महीने के लिए उपलब्ध है। इसके लिए 9518288171 पर संपर्क करें।

सरसो खल पर क्या है अपडेट
किसान साथियो और व्यापारी भाइयो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 20 मार्च 2025 से चीन ने कनाडा से कृषि उत्पादों के आयात पर 100% लगा दिया है। हमने चीन द्वारा कनाडा से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत जवाबी टैरिफ लगाने का लाभ भारत को मिलने की बात कहीं थी और ऐसा अब दिखने लगा है। चीन ने पिछले तीन हफ्तों में भारत से 52,000 टन सरसों खल की खरीद की है, जो कि 2024 में पूरे वर्ष चीन द्वारा भारत से खरीदे गए सरसों खल की मात्रा का लगभग चार गुना है। उद्योग के जानकारों के अनुसार, चीन सरसों खल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और कनाडा से आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत इस कमी को पूरा करने की स्थिति में है। चीन को निर्यात में वृद्धि होने से भारत में सरसों खल की कीमतों पर बना हुआ दबाव भी कम होगा, जो अत्यधिक स्टॉक के कारण लंबे समय से महसूस किया जा रहा था। अगर आप भी मंडी बाजार से जुड़े हैं और आपको रोजाना भाव और आगे का अनुमान साथ में आयात-निर्यात से संबंधित जानकारी चाहते हैं, तो हमारी प्रीमियम सेवा मात्र ₹500 में 6 महीने के लिए उपलब्ध है। इसके लिए 9518288171 पर संपर्क करें। निर्यात बढ़ने से घरेलू बाजार में सरसों खल की कीमतों में भी उछाल आ सकता है, जिसका मुख्य उपयोग पशुधन के चारे के रूप में किया जाता है। एक प्रमुख सरसों खल निर्यातक ने जानकारी दी कि कनाडाई आपूर्ति पर टैरिफ लगने के बाद से चीनी खरीदारों ने हाल के हफ्तों में भारतीय सरसों खल में दिलचस्पी दिखाई है। चीन ने 20 मार्च से कनाडाई सरसों खल और तेल पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, चीन ने तत्काल शिपमेंट के लिए भारतीय सरसों खल 220 से 235 डॉलर प्रति मीट्रिक टन (लागत और माल ढुलाई के आधार पर) की दर पर खरीदा है।

भारत के लिए बड़ा अवसर
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सरसों खल उत्पादक होने के बावजूद, भारत अधिक कीमतों के कारण पहले चीन को बड़े पैमाने पर सरसों खल का निर्यात नहीं कर पाया था। वर्ष 2024 में चीन ने मुख्य रूप से कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात और रूस से सरसों खल का आयात किया, जबकि भारत से केवल 13,100 टन ही खरीदा था। हालांकि, भारत ने कुल मिलाकर 20 लाख टन से अधिक सरसों खल का निर्यात किया, जिसमें चीन का हिस्सा एक प्रतिशत से भी कम था। अब एक सूत्र के अनुसार, चीनी मांग में काफी वृद्धि देखी जा रही है और यदि यह खरीद की गति अगले कुछ महीनों तक बनी रहती है, तो चीन भारतीय सरसों खल का सबसे बड़ा खरीदार बन सकता है। परंपरागत रूप से, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, थाईलैंड और वियतनाम भारत के सरसों खल के प्रमुख ग्राहक रहे हैं। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता का मानना है कि भारत इस वर्ष अपने शिपमेंट को 20 लाख टन से बढ़ाकर 25 लाख टन तक कर सकता है, क्योंकि देश में अधिशेष है और वैश्विक बाजार में टेरिफ वॉर के चलते अस्थिरता है।

फ़िलहाल स्थिति खराब लेकिन सुधर सकते हैं खल के रेट
20 मार्च 2025 से चीन द्वारा कनाडा से कृषि उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाने के बाद भारत को सरसों खल निर्यात का बड़ा फायदा मिलने लगा है। बीते तीन हफ्तों में चीन ने भारत से 52,000 टन सरसों खल खरीदी है, जो कि पूरे 2024 में चीन द्वारा भारत से खरीदी गई खल की मात्रा से चार गुना ज्यादा है। इससे पहले चीन मुख्य रूप से कनाडा, यूएई और रूस से खल मंगाता था और भारत से केवल 13,100 टन ही खरीदी थी, लेकिन अब कनाडा से आपूर्ति रुकने के कारण चीन ने भारत की ओर रुख किया है। चीन को हाल ही में भारतीय सरसों खल की खरीद 220 से 235 डॉलर प्रति टन की दर पर की गई है। अगर आप भी मंडी बाजार से जुड़े हैं और आपको रोजाना भाव और आगे का अनुमान साथ में आयात-निर्यात से संबंधित जानकारी चाहते हैं, तो हमारी प्रीमियम सेवा मात्र ₹500 में 6 महीने के लिए उपलब्ध है। इसके लिए 9518288171 पर संपर्क करें। घरेलू बाजार में खल का भारी स्टॉक होने के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ था और FOB रेट फरवरी में 248 डॉलर से गिरकर अब 200 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया है, लेकिन चीन की बढ़ती खरीद से इसमें सुधार की उम्मीद है। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि चीन की यह मांग कुछ और महीनों तक बनी रही तो वह भारत का सबसे बड़ा ग्राहक बन सकता है। SEA के अनुसार भारत इस साल सरसों खल का निर्यात 20 लाख टन से बढ़ाकर 25 लाख टन तक कर सकता है। परंपरागत ग्राहक जैसे बांग्लादेश, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया और वियतनाम के साथ अब चीन का जुड़ना भारत के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा बल्कि घरेलू बाजार में दबाव कम होगा और किसानों व प्रोसेसर्स को भी राहत मिलेगी।

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।