मिडिल ईस्ट तनाव ने चावल व्यापार को झटका दिया
Mar 23, 2026, 10:13 IST
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब भारत के चावल बाजार, मध्य प्रदेश के रायसेन और बालाघाट पर भी देखने को मिल रहा है, जहां से बासमती और उबले हुए गैर-बासमती चावल का बड़ा निर्यात होता है। हालात ऐसे बन गए हैं कि रायसेन से भेजा जाने वाला बासमती चावल इस समय बंदरगाहों, गोदामों और फैक्ट्रियों में फंसा पड़ा है, जिससे निर्यातकों को समय पर ऑर्डर पूरा करने में भारी दिक्कत आ रही है। माल ढुलाई दरों में करीब 30% तक की बढ़ोतरी हो चुकी है और कंटेनरों की भारी कमी के चलते लागत और बढ़ गई है, पहले जो कंटेनर करीब 2500 डॉलर में मिल जाता था, अब वही 3200 डॉलर में भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहा। इस पूरी स्थिति का असर सीधे कीमतों पर पड़ा है, जहां पूसा बासमती चावल के भाव में 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ गई है। धान की आवक भी धीरे-धीरे कम हो रही है और किसानों के पास सीमित स्टॉक ही बचा है,
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जिससे सप्लाई चेन भी कमजोर होती जा रही है। रायसेन जिले में करीब 3.45 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है और यहां से हर साल 6 लाख टन से ज्यादा चावल का उत्पादन होता है, लेकिन मौजूदा हालात में कई चावल मिलें अस्थायी रूप से बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। इसी तरह बालाघाट क्षेत्र, जहां से उबले हुए गैर-बासमती चावल का बड़ा निर्यात होता था, वहां भी स्थिति खराब हो गई है, पहले जहां रोजाना करीब 500 टन चावल का निर्यात होता था, अब वह काफी घट गया है, खासकर पूर्वी अफ्रीका के देशों को निर्यात लगभग रुक चुका है और पश्चिमी अफ्रीका में भी सीमित मात्रा में ही सप्लाई हो रही है। बड़े उद्योगपतियों के कारोबार में करीब 25% तक की गिरावट आ चुकी है, जबकि छोटे व्यापारी लगभग ठप हो गए हैं। इस संकट का असर स्थानीय बाजार भाव पर भी देखने को मिल रहा है। निर्यात में आई इस गिरावट से आगे की जानकारी के लिए whatsapp ग्रुप जॉइन करे (9306639343) रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, जिससे किसान, मिलर्स और निर्यातक सभी इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। चावल की रेगुलर सर्विस के लिए 9306639343 पर मैसेज करें।
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जिससे सप्लाई चेन भी कमजोर होती जा रही है। रायसेन जिले में करीब 3.45 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है और यहां से हर साल 6 लाख टन से ज्यादा चावल का उत्पादन होता है, लेकिन मौजूदा हालात में कई चावल मिलें अस्थायी रूप से बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। इसी तरह बालाघाट क्षेत्र, जहां से उबले हुए गैर-बासमती चावल का बड़ा निर्यात होता था, वहां भी स्थिति खराब हो गई है, पहले जहां रोजाना करीब 500 टन चावल का निर्यात होता था, अब वह काफी घट गया है, खासकर पूर्वी अफ्रीका के देशों को निर्यात लगभग रुक चुका है और पश्चिमी अफ्रीका में भी सीमित मात्रा में ही सप्लाई हो रही है। बड़े उद्योगपतियों के कारोबार में करीब 25% तक की गिरावट आ चुकी है, जबकि छोटे व्यापारी लगभग ठप हो गए हैं। इस संकट का असर स्थानीय बाजार भाव पर भी देखने को मिल रहा है। निर्यात में आई इस गिरावट से आगे की जानकारी के लिए whatsapp ग्रुप जॉइन करे (9306639343) रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, जिससे किसान, मिलर्स और निर्यातक सभी इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। चावल की रेगुलर सर्विस के लिए 9306639343 पर मैसेज करें।
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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।