किसानों की रोक से जीरा में दमदार वापसी
Mar 23, 2026, 10:13 IST
बीते सप्ताह में जीरा बाजार ने एक बार फिर अपनी मजबूती दिखा दी, और इसकी सबसे बड़ी वजह रही पिछले दिनों आई गिरावट के बाद किसानों ने माल रोकना शुरू कर दिया, जिससे मंडियों में सप्लाई उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी और बाजार में मजबूती देखने को मिली। ऊंझा मंडी में जहां इस समय आवक केवल 35–40 हजार बोरी के आसपास चल रही है, वहीं पिछले साल इसी समय 50–55 हजार बोरी की आवक थी। वहीं राजस्थान की मंडियों में भी आवक सीमित रही, जिससे बाजार में टाइटनेस बनी रही। भाव की बात करें शनिवार को ऊंझा में मीडियम भाव ₹19500 और बेस्ट क्वालिटी ₹22200, जोधपुर में ₹23,000, मेड़ता ₹22,500, नागौर ₹21,500 और नोखा में ₹21,000 प्रति क्विंटल में कारोबार हुआ, जबकि मुंबई में ₹25,500 और बेस्ट क्वालिटी ₹29,500 तक पहुंच गई। दिल्ली में मशीनकट ₹26,000 और बेस्ट ₹32,000 तक बोली गई। इस सप्ताह जीरे के भाव करीब ₹8–10 प्रति किलो बढ़कर ₹190–220 प्रति किलो तक पहुंच गए, जो साफ तौर पर लोकल स्टॉकिस्ट डिमांड और कम सप्लाई का असर है। हालांकि वायदा बाजार में हल्की कमजोरी देखने को मिली, NCDEX अप्रैल ₹22,150 (-5) और मई ₹22,345 (-45) पर बंद हुआ। इस साल जीरे की कुल बुवाई 11.18 लाख हेक्टेयर में हुई है
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, जो पिछले साल के 11.71 लाख हेक्टेयर से कम है, और मौसम की प्रतिकूलता के कारण उत्पादन घटकर 88–90 लाख बोरी रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 97–98 लाख बोरी हुआ था। गुजरात में उत्पादन 32–34 लाख बोरी तक सीमित रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 44–45 लाख बोरी से काफी कम है, जबकि राजस्थान में उत्पादन 54–55 लाख बोरी के आसपास रहने की संभावना है। वर्तमान में गुजरात में आवक 60–65 हजार बोरी और राजस्थान में 22–25 हजार बोरी चल रही है, लेकिन नए माल की देरी से आवक का दबाव अप्रैल में बन सकता है, हालांकि कुल उत्पादन कम होने से सप्लाई बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेगी। निर्यात की बात करें तो यहां थोड़ी चिंता जरूर दिख रही है, क्योंकि अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान निर्यात 156,671 टन रहा, जो पिछले साल के 178,847 टन से 12% कम है, यानी एक्सपोर्ट डिमांड फिलहाल दबाव में है, लेकिन निर्यात में यह गिरावट मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण है और जैसे ही हालात सुधरेंगे, निर्यात मांग वापस आ सकती है और बाजार को नया सपोर्ट मिल सकता है। कुल मिलाकर इस सप्ताह जीरा बाजार में फंडामेंटल सपोर्ट मजबूत रहा और लॉन्ग टर्म में जीरे में मजबूती की उम्मीद की जा रही है, लेकिन आगे की जानकारी के लिए whatsapp ग्रुप जॉइन करे (9306639343) को मिल सकता है। व्यापार अपने विवेक से करें। जीरे की रेगुलर सर्विस के लिए 9306639343 पर मैसेज करें।
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, जो पिछले साल के 11.71 लाख हेक्टेयर से कम है, और मौसम की प्रतिकूलता के कारण उत्पादन घटकर 88–90 लाख बोरी रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 97–98 लाख बोरी हुआ था। गुजरात में उत्पादन 32–34 लाख बोरी तक सीमित रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 44–45 लाख बोरी से काफी कम है, जबकि राजस्थान में उत्पादन 54–55 लाख बोरी के आसपास रहने की संभावना है। वर्तमान में गुजरात में आवक 60–65 हजार बोरी और राजस्थान में 22–25 हजार बोरी चल रही है, लेकिन नए माल की देरी से आवक का दबाव अप्रैल में बन सकता है, हालांकि कुल उत्पादन कम होने से सप्लाई बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेगी। निर्यात की बात करें तो यहां थोड़ी चिंता जरूर दिख रही है, क्योंकि अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान निर्यात 156,671 टन रहा, जो पिछले साल के 178,847 टन से 12% कम है, यानी एक्सपोर्ट डिमांड फिलहाल दबाव में है, लेकिन निर्यात में यह गिरावट मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण है और जैसे ही हालात सुधरेंगे, निर्यात मांग वापस आ सकती है और बाजार को नया सपोर्ट मिल सकता है। कुल मिलाकर इस सप्ताह जीरा बाजार में फंडामेंटल सपोर्ट मजबूत रहा और लॉन्ग टर्म में जीरे में मजबूती की उम्मीद की जा रही है, लेकिन आगे की जानकारी के लिए whatsapp ग्रुप जॉइन करे (9306639343) को मिल सकता है। व्यापार अपने विवेक से करें। जीरे की रेगुलर सर्विस के लिए 9306639343 पर मैसेज करें।
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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।