4500 के उपर क्यूँ नहीं जा रहे धान के रेट | इस रिपोर्ट में जाने

 

किसान साथियो भारत सरकार ने पिछले साल दिसंबर में चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई थी, जिसके कारण एक किलो चावल पर 10 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लग रहा था। हालांकि, इस साल अक्टूबर में सरकार ने यह शुल्क वापस ले लिया। इसके बाद भारत से चावल का निर्यात अभी धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है। इसका कारण यह है कि जब भारत में निर्यात शुल्क लगा था, तब अन्य देशों ने अपने लिए चावल के वैकल्पिक स्रोत ढूंढ लिए थे। संघ के पूर्व अध्यक्ष राजेश तापड़िया के अनुसार, पाकिस्तान भी चावल का एक बड़ा उत्पादक देश है और उसने भारत के निर्यात प्रतिबंध के दौरान अन्य देशों को चावल का निर्यात किया होगा। हालांकि भारत में जितना चावल पैदा होता है, उतना पाकिस्तान में नहीं होता है। लेकिन फिर भी काफी डिमांड पाकिस्तान की तरफ मुड़ गई थी।

साथियो हाल ही में धान के भाव में गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण खाड़ी देशों में युद्ध और चावल के भाव में गिरावट होना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी भी शांति बहाल नहीं हुई है जहाज के किराए और बीमा का खर्च बढ़ गया है । इसके अलावा पिछले कुछ महीनों से निर्यात शुल्क लगे होने के कारण विदेशी देशों ने भारत से चावल का आयात कम कर दिया था और पड़ोसी देशों से चावल खरीदना शुरू कर दिया था। हालांकि भारत सरकार ने अक्टूबर में यह शुल्क हटा लिया, लेकिन विदेशी बाजार पहले ही अन्य देशों से जुड़ चुके थे। उदाहरण के लिए लिए बता दें कि राजस्थान के बूंदी क्षेत्र में उत्पादित अधिकतर चावल का निर्यात किया जाता है, भारत में इस चावल की खपत बहुत कम होती है।

बूंदी क्षेत्र से 5 साल में निर्यात कितना निर्यात हुआ है
2020 से 2021 में 1600 से 1650 करोड़ रुपए का हुआ
2021 से 2022 में 1700 से 1800 करोड़ रुपए का हुआ
2021 से 2022 में 1900 से 2000 करोड़ रुपए का हुआ
2022 से 2023 में 2000 से 2100 करोड़ रुपए का हुआ
2023 में चावल इम्पोर्ट डयूटी टैक्स के कारण निर्यात नहीं हुआ ।

विदेशों में कितना चावल निर्यात
बूंदी मंडी का 90% चावल पहले विदेशों में निर्यात होता था, लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण चावल का निर्यात प्रभावित हुआ है। इजरायल और ईरान के बीच तनाव के कारण समुद्री मार्गों में अशांति बढ़ गई है जिससे माल ढुलाई महंगी हो गई है। इसके अलावा, भारत से चावल आयात करने वाले देशों ने अन्य देशों से चावल का आयात शुरू कर दिया है। इन कारणों से बूंदी के किसानों को धान के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। पिछले साल जहां धान 3700 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल बिका था, वहीं इस साल किसानों को 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है। कई किसान तो भाव बढ़ने की उम्मीद में अपनी फसल को मंडी में नहीं ला रहे हैं। बूंदी की मंडियों में धान के ढेर लगे हुए हैं, लेकिन किसानों को इनका उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

क्यों नहीं मिले 5000 के रेट
दोस्तों इस सीज़न में 4500 के उपर के भाव हरियाणा की किसी मंडी में नहीं दिखे हैं, पंजाब, मध्यप्रदेश और राजस्थान की मंडियों के हालत इससे भी बुरी है। धान के भाव में चल रही मंदी को राजस्थान के बूंदी क्षेत्र के उदाहरण से समझा जा सकता है। राजस्थान का बूंदी जिला देश में धान उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यहां लगभग 60 हजार किसान धान की खेती करते हैं और 25 राइस मिलें हैं। बूंदी मंडी में हाड़ौती क्षेत्र सहित मध्य प्रदेश से भी धान आता है और यहां धान के अच्छे भाव मिलते हैं। बूंदी मंडी का चावल अपनी उच्च गुणवत्ता के लिए जाना जाता है और इसे सऊदी अरब, इराक, इरान जैसे कई देशों में निर्यात किया जाता था। इससे बूंदी की अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिलती थी। हालांकि, इस समय में बूंदी मंडी के चावल के निर्यात में गिरावट आई है। इसका मुख्य कारण खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध और चावल के भाव का घटना है। इसके अलावा जहाजों के किराये और बीमा कंपनियों के रेट बढ़ने के कारण निर्यातकों को चावल के निर्यात पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप वे अन्य देशों को चावल की आपूर्ति कम कर रहे हैं। इसने बूंदी के किसानों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। पिछले साल जहां धान के दाम 3700 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल थे, वहीं इस साल यह घटकर 2300 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। इससे किसानों की आय में भारी गिरावट आई है।

हरियाणा और पंजाब में धान की क्या स्थिति है
हरियाणा और पंजाब की बात करे तो पिछले साल इस समय धान के भाव 4500 से 5000 रूपये तक के चल रहे है थे लेकिन पिछले साल जहां पंजाब में सबसे ज्यादा भाव मिल रहा था वहां अभी हरियाणा से भी कम भाव मिल रहा है। पिछले साल पंजाब में धान 1121 का भाव 5000 को भी पार कर गया था वहीँ इस साल धान के सीजन में 4000 से 4200 तक के ही भाव बमुश्किल देखने को मिल रहे हैं।  फिलहाल कुछ मंडियों में सुधार होने लगा है और भाव 4300 से 4500 तक पहुंच गया है लेकिन पिछले दो दिनों में चावल के भाव गिरे हैं जिसका नेगेटिव असर बाजार पर फिर से दिखने लगा है। अगर हालिया भाव की बात करे तो धान का भाव 4100 से 4300 तक चल रहा है। ताजा भाव की बात करें तो हरियाणा की मंडियों में धान के भाव कुछ इस प्रकार चल रहे हैं। समालखा मंडी में धान 1121 हाथ भाव ₹ 4331 तेजी 50, नारनौंद मंडी में ₹ 4271 तेजी 10, हांसी मंडी में ₹ 4251 तेजी 1, गोहाना मंडी में ₹ 4334 तेजी 16, और पिल्लूखेड़ा मंडी में ₹ 4310 तेजी 37 रहे और पंजाब की मंडियों में धान के भाव कुछ इस प्रकार रहे तरनतारन मंडी में धान 1121 हाथ भाव ₹ 4274 तेजी 105, अमृतसर मंडी में ₹ 4300 मंदी 56, मलोट मंडी में ₹ 4200, खन्ना मंडी में ₹ 4275, और बटाला मंडी में ₹ 4365 रहे।

क्या और तेज होंगे रेट
किसान साथियों और व्यापारी भाइयों हमारे कुछ समृद्ध किसान हैं जो हर साल धन को स्टॉक करते हैं। इस बार भी काफी किसानों ने धान को स्टॉप किया हुआ है और वह जाना चाहते हैं कि आने वाले समय में धान के भाव बढ़ेंगे या नहीं। दोस्तों धान के भाव को बढ़ने के लिए यह जरूरी है कि चावल के भाव में वृद्धि हो। लेकिन जिस तरह से खबरें मिल रही है ऐसा दिख नहीं रहा है कि चावल के भाव में कुछ तेजी बन रही है। चावल के भाव में लगातार गिरावट चल रही है। खास तौर पर PB1 और 1718 के भाव लगातार दबाव में है। इस स्थिति को देखते हुए धान के भाव में बड़ी तेजी आएगी ऐसा नहीं लगता। इस समय मंडियों में धान की आवक बनी हुई है। सीज़न लंबा खिंच सकता है। मंडी भाव टुडे अभी अपनी रिकमेंडेशन पर कायम है जो साथी माल को होल्ड करना चाहते हैं उन्हें हरियाणा क्षेत्र में 1121 धान के 4200 के भाव को मॉनिटर करना चाहिए। जैसे ही 1121 का भाव 4200 के नीचे जाता है तो यह एक बड़ी कमजोरी का संकेत माना जाएगा इस परिस्थिति में भाव नीचे जाकर 3800 तक भी जा सकते हैं। जब तक धान का टॉप भाव 4200 के ऊपर बना हुआ है तब तक 4500 के भाव आने की उम्मीद बनी रहेगी हालांकि 4500 के उपर के भाव का इंतज़ार लंबा हो सकता है।

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।