मंडियों में कम आवक के चलते घटी सरकारी खरीद

 

किसान साथियों गेहूं की कटाई का सीजन अपने टॉप पर चल रहा है। मंडियों में गेहूं के अंबार लगे हुए हैं । लेकिन सरकारी खरीद (Wheat MSP purchase) के आंकड़ों को देखते हुए ऐसा लगता है कि सरकार को इस बार भी लक्ष्य के अनुसार गेहूं नहीं मिल पाएगा । ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि सरकार ने चालू विपणन वर्ष 2023-2024 में अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) पर सीधे किसानों से 41 लाख टन गेहूं की खरीद की है जो एक साल पहले की तुलना में 18 फीसदी कम है। ऐसे में अब बाजार में इस तरह की बातें चल रही है की आगे चलकर गेहूं का भाव बढ़ सकता है। आज की रिपोर्ट में हम गेहूं के भाव को लेकर बन रही संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। Whatsapp पर भाव देखने के लिए ग्रुप जॉइन करें

भारतीय खाद्य निगम(FCI) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अशोक के मीणा ने कहा है कि गेहूं की सरकारी खरीद में कमी होने की मुख्य वजह  बेमौसम बारिश के कारण कटाई में देर होना है । यही वजह है कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान की मंडियों में अभी तक आवक कम देखने को मिल रही है । उनका कहना है कि गेहूं के बड़े उत्पादक राज्य के अनेक हिस्सों में बेमौसम बारिश से फसल को नुकसान होने के साथ-साथ कुछ जगहों पर अनाज की गुणवत्ता भी खराब हुई है। जैसा कि अखबारों के द्वारा जानकारी मिल रही है कि सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए पांच राज्यों - उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में गेहूं की खरीद के नियमों (Wheat Purchase Norms) में ढील दी है। एफसीआई के प्रबंधक मीणा ने बताया कि मौजूदा विपणन वर्ष में 16 अप्रैल तक गेहूं की खरीद 41 लाख टन तक पहुंच गई है, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में रही 50 लाख टन की खरीद से यह थोड़ी कम है।  उन्होंने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में सरकारी खरीद में तेजी आने की संभावना है। श्री मीणा के अनुसार  पंजाब और हरियाणा की मंडियों में गेहूं की आवक बेहतर है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एफसीआई राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है जो राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की खरीद करती है। सरकार द्वारा की जाने वाली यह खरीद उत्पादक किसानों के हितों को सुरक्षित रखने के साथ साथ विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए बफर स्टॉक बनाए रखने के लिए भी की जाती है।

हमने अपनी पिछली रिपोर्टों में भी बताया है कि सरकार ने चालू विपणन वर्ष 2023-24 के लिए 3.42 करोड़ टन गेहूं का खरीद लक्ष्य तय किया है। हालांकि 2022-23 के विपणन वर्ष में सरकार के द्वारा केवल 1.9 करोड़ टन की वास्तविक खरीद की गई थी। जैसा की आप सबको पता है कि पिछले साल गर्मी की लहर के कारण गेहूं का दाना सिकुड़ गया था और घरेलू गेहूं उत्पादन में गिरावट आने के चलते गेहूं की खरीद कम हुई थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस साल खराब मौसम और ओलावृष्टि के बावजूद गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 11.218 करोड़ टन रहने का अनुमान है । सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस साल निर्धारित लक्ष्य के बराबर गेहूं की सरकारी खरीद कर ली जाएगी। सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2125 रुपए प्रति कुंटल रखा है।

गेहूं की कम आवक को देखते हुए पिछले हफ्ते में गेहूं के भाव 20 से 25 प्रति क्विंटल तक बढ़ गए थे । लेकिन सोमवार को गेहूं की आवक में सुधार होने के कारण भाव फिर से एमएसपी के आसपास आ गए हैं। सोमवार को दिल्ली लारेंस रोड पर गेहूं के भाव ₹30 प्रति कुंटल तक गिर गए अंतिम भाव ₹2280 प्रति कुंटल तक रिपोर्ट किए गए हैं । दिल्ली की नरेला मंडी में भी गेहूं के भाव ₹2280 प्रति कुंटल पर बने हुए हैं । मंडी भाव टुडे का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में गेहूं की आवक और नहीं बढ़ती है तो गेहूं के भाव में थोड़ी बहुत तेजी और बन सकती है। हालांकि अगले साल चुनाव होने के चलते सरकार गेहूं के भाव को नियंत्रण में रखने के लिए बड़े कदम उठा सकती है। ऐसे में गेहूं के भाव में बड़ी तेजी की संभावना कम है। बाजार के जानकारों का कहना है कि अच्छी क्वालिटी के गेहूं के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य 2125 रुपए प्रति क्विंटल से नीचे जाने की संभावना कम है।

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मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।